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...सिर झुके हैं सबके इस संवेदना के सामने

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करनैलगंज (गोंडा)। साहित्यिक संस्था बज्मे शामे गजल का वार्षिक तरही मुसालमा, तरह मिसरा, है चरागे करबला रौशन हवा के सामने कार्यक्रम का आयोजन बीते दिन नगर के कसगरान मोहल्ले में हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ कारी मोहम्मद अहमद की तिलावत व सगीर सिद्दीकी की नात से हुआ। मुजीब सिद्दीकी ने वाकयाते करबला पर तकरीर पेश की।
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कार्यक्रम में नासिर जरवली ने पेश किया - हाथ मलता है यजीदियत का तकरीबी निजाम, है चरागे करबला रौशन हवा के सामने। काजी शब्बीर शबनम ने कहा - जीत हक की हो गई और खाई बातिल ने शिकस्त, जुल्म शर्मिंदा हुआ सब्रो रजा के सामने। मोहम्मद नकी ने पेश किया - इम्तिहां गाहे वफा में एक गुले बागे रसूल, मुस्कुरा के आया तीरे हुरमुला के सामने। अनीस आरिफी ने कहा - वक्ते आखिर कर्बला ले चल मुझे सोजे फिराक, वह हों मेरे रूबरू और मैं कजा के सामने। वीरेंद्र बेतुक ने कहा - मारकर असगर को दुश्मन ने किया दुष्कर्म, जो शर्म खाती है खता ऐसी खता के सामने। रमाशंकर चेतन ने कहा - अश्रु पूरित चक्षु हैं, सबके ये घटना देखकर, सिर झुके हैं सबके इस संवेदना के सामने। कार्यक्रम की अध्यक्षता नासिर जरवली व संचालन याकूब अज्म ने किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सूफी सैय्यद इजहार अली व विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर डॉ. सरवत तकी एवं शहाब खां रहे। कार्यक्रम में नसीर बाराबंकवी, गणेश तिवारी नैश, मुजीब सिद्दीकी, अहसन आजमी, अंजुम जैदी एवं कारी मुमताज समेत कई अन्य कवि व शायरों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। इस मौके पर साबिर, शुुएब अंसारी, कयूम, कलाम वारसी, रहबर हुसैन, जावेद खां, करीम, मक्खन आदि मौजूद रहे।
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