बहराइच। तराई में बदल रहे मौसम के बीच बुखार और डायरिया के साथ निमोनिया भी पैर पसारने लगा है। जिला अस्पताल में भर्ती चार मासूमों की इलाज के दौरान रविवार देर रात से सोमवार सुबह तक मौत हो गई। यह सभी तेज बुखार और निमोनिया की चपेट में थे। वहीं बुखार, निमोनिया और डायरिया से पीड़ित और 25 रोगी भर्ती हुए हैं। इनमें पांच रोगियों की हालत गंभीर होने पर उन्हें आईसीयू में शिफ्ट किया गया है। इनमें से दो रोगियों की हालत में सुधार न होने पर उन्हें केजीएमयू लखनऊ रेफर कर दिया गया है।
तराई में मौसम परिवर्तन नन्हे-मुन्नों की जिंदगी पर भारी पड़ रहा है। हालात यह हैं कि मौसम परिवर्तन के साथ ही बुखार और डायरिया के साथ अब निमोनिया भी तेजी से पैर पसार रहा है। 0 से 8 वर्ष तक के बच्चे चपेट में आ रहे हैं। नानपारा निवासी अनामिका (डेढ़) पुत्री अयोध्या प्रसाद को कई दिनों से बुखार की शिकायत थी। स्थानीय डॉक्टरों से परिवारीजनों ने इलाज कराया। लाभ न होने पर उसे जिला अस्पताल पहुंचाकर भर्ती कराया गया। रविवार रात 10 बजे के आसपास उसकी मौत हो गई। उधर कोतवाली देहात के चौखड़िया निवासी रिया (3) पुत्री रामकृष्ण को उल्टी-दस्त के साथ बुखार की शिकायत पर परिवारीजनों ने अस्पताल पहुंचाकर भर्ती कराया। रिया ने सुबह आठ बजे इलाज के दौरान दम तोड़ा। उसकी श्वांस भी उल्टी चल रही थी। निमोनिया की भी शिकायत थी। वहीं रानीपुर के ऐलिहा निवासी कोमल (5) पुत्री इंदल तथा पयागपुर निवासी अमन (5) पुत्र सुशील कुमार की भी इलाज के दौरान सोमवार सुबह मौत हुई। दोनों को बुखार और निमोनिया की शिकायत पर भर्ती कराया गया था। ताबड़तोड़ चार बच्चों की मौत से कोहराम की स्थिति रही। परिवारीजन रोते-बिलखते शव लेकर घर लौट गए। वहीं चिल्ड्रेन वार्ड में सोमवार को बुखार व डायरिया से पीड़ित 25 और रोगी भर्ती हुए हैं। इनमें पांच रोगियों की हालत नाजुक है। शहर के मोहल्ला काजीपुरा निवासी मोहम्मद अंसार की चार दिन की पुत्री व गिलौला निवासी सुनीता (डेढ़) पुत्री मंशाराम की हालत गंभीर होने पर उन्हें केजीएमयू लखनऊ रेफर कर दिया गया है।
नाजुक हालत में लाए गए थे मरीज
जिला अस्पताल के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ केके वर्मा का कहना है कि देर रात से सोमवार सुबह तक जिन मासूमों की मौत हुई है। उनकी हालत काफी नाजुक थी। परिवारीजनों ने स्थानीय स्तर पर मनमाने तरीके से इलाज कराया। समुचित दवाइयां नहीं मिलीं। जिससे बच्चों की हालत बिगड़ी है। इसके बाद उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टर वर्मा ने कहा कि बदल रहे मौसम के बीच अभिभावकों को सजग रहना होगा। तभी बच्चों की सेहत सुरक्षित रहेगी। हल्का बुखार होने पर योग्य चिकित्सक से ही इलाज कराएं।