रैगिंग रोकने के लिए 80 वरिष्ठ डॉक्टरों की टीम होगी तैनात
कैमरे की निगरानी में रहेंगे नवागत छात्र
केजीएमयू में एक अगस्त से शुरू होने वाले सत्र को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। केजीएमयू प्रशासन रैगिंग रोकने के लिए फूलप्रूफ रणनीति तैयार की है। हॉस्टल के कैमरों को दुरुस्त करा दिया गया है। हॉस्टल के अगले गेट से लेकर उनके क्लास रूम तक के रास्ते में भी कैमरे लगवाए जा रहे हैं। इसकेअलावा 80 वरिष्ठ चिकित्सकों की टीम भी निगरानी करेगी। पूरे परिसर में रैगिंग रोकने संबंधित बोर्ड लगाए जा रहे हैं। इस पर चीफ प्रॉक्टर सहित अन्य प्रशानिक अधिकारियों के मोबाइन नंबर लिए जाएंगे।
केजीएमयू में एमबीबीएस की 250 और बीडीएस की 70 सीटें हैं। तमाम प्रयास के बाद भी रैगिंग की घटनाएं होती रही हैं। पिछले साल नवीन सीवी हॉस्टल के कमरा नंबर नौ की खिड़की से रैगिंग हुई थी। इस बार इस खिड़की को बंद करा दिया गया है। अन्य खिड़कियों पर भी नई जालियां लगवाई गई हैं। इसके अलावा सभी कैमरे दुरुस्त करा दिए गए हैं। हॉस्टल के वार्डेन डॉ. मनीष बाजपेयी ने बताया कि किसी भी कीमत पर रैगिंग नहीं हो सकती है। चीफ प्रॉक्टर डॉ. आरएएस कुशवाहा केनेतृत्व में 30 सदस्यों का प्रॉक्टोरियल बोर्ड रहेगा। इसके अलावा वार्डेन व एंटी रैगिंग सेल में करीब 38 लोग शामिल हैं। चार बाउंसर लगाए गए हैं। इसके अलावा सुरक्षाकर्मी भी मौजूद रहेंगे। इसमें पुरुष एवं महिला सुरक्षाकर्मी भी शामिल होंगे।
इस बार चुनौतियां ज्यादा
एमबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्रों को इस बार अंग्रेजी की क्लास और मरीजों केसाथ भी रखा जाएगा। ऐसे में रैगिंग की आशंका ज्यादा है। यही वजह है कि केजीएमयू प्रशासन रैगिंग को लेकर विशेष रणनीति बना रहा है।