एडमिशन नंबर का उपयोग होने की वजह से एक विद्यार्थी सिर्फ एक फॉर्म ही भर सकता है। फीडबैक फॉर्म के पहले भाग में 20 बिंदु हैं। ये सभी शिक्षक और पठन-पाठन पर आधारित हैं। जैसे- कक्षा में शिक्षक की उपस्थिति, उसका व्यवहार, पढ़ाने का तरीका आदि।
कुलपति ने बताया कि नैक ने भी शिक्षक और विद्यार्थी के बीच संवाद के लिए आॅनलाइन जांच की व्यवस्था की है । प्रो. निशि पांडेय ने कहा कि अभी तक इंटरनेट कंनेक्टिविटी का स्तर बेहद खराब है। कुलपति ने कहा कि वाई-फाई का काम चल रहा है। जल्द ही इसकी सुविधा मिलने लगेगी
लविवि ने पिछले साल जनवरी में इस पोर्टल की शुरुआत की थी। इसलिए फीडबैक की संख्या बेहद कम है। पिछले साल सिर्फ 264 विद्यार्थियों ने फीडबैक दिया है। इसके आधार पर ही शिक्षकों का रिपोर्ट कार्ड तैयार किया गया है।
कुछ शिक्षकों ने सैंपल के इतने कम स्तर पर सवाल उठाए। हालांकि इस साल यह संख्या ज्यादा होने की उम्मीद है। फीडबैक ऐच्छिक रखा गया है। आगे इसे अनिवार्य किया जा सकता है।