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78 वर्षो से अवधी में हो रही रामलीला।

Mon, 29 Sep 2014 12:28 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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ताड़का वध के बाद राम आगे बढ़ते दिखे। मार्ग में शिला देख गुरु विश्वामित्र से पूछा ‘मग में शिला ये कैसी, मुनिवर हमें बताओ, सूना पड़ा है आश्रम कारण मुझे बताओ.।
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हलकी मुस्कान चेहरे पर लिए विश्वामित्र ने अहिल्या के शिला बनने की कहानी कुछ यूं बयां की-‘गौतम नारी शापवश उपल देह धर धीर, चरण कमल रज चाहती कृपा करो रघुवीर’।

आदेशानुसार राम ने शिला को पैरों से छुआ, अहिल्या नारी रूप में लौटीं और करुण स्वर में बोलीं ‘मैं नारी अपावन प्रभु जग पावन, रावण रिपुजन सुखदाई, मुनि श्राप जो दीन्हा अतिभल कीन्हा, परम अनुग्रह मैं माना’।..रोशनी मद्धिम हुई और दृश्य समाप्त।
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चिनहट की श्री जीवन सुधार रामायणी सभा की रामलीला में संवाद, अभिनय और संजीदगी का ऐसा ही नपा-तुला संगम देखने को मिलता है। रविवार को रामलीला में अहिल्या उद्धार, गंगा लीला और नगर भ्रमण के दृश्य मंचित किए गए।

जिसे देखने के लिए आसपास के इलाकों से भीड़ जुटी। निर्देशन देवेंद्र कुमार पांडेय का रहा। 78 वर्ष पुरानी इस रामलीला की खासियत यहां लगने वाला ऐतिहासिक मेला है, जो विजयादशमी पर लगता है।

समिति अध्यक्ष शिवमन्यू मिश्र बताते हैं कि संवादों में परम्परागत रूप से अवधी भाषा का इस्तेमाल होता आ रहा है। खास बात है स्थानीय कवियों शिवदुलारे व अयोध्या प्रसाद वर्मा के लिखे हुए गीतों व छंदों संवादों के हिस्से हैं।

महानगर रामलीला में रविवार को रामजन्म के साथ आयोध्या में छाई खुशियां का मंचन हुआ तो भगवान राम भी बॉल से खेलते नजर आए।

कवि वेदव्रत को तुलसी सम्मान
ऐशबाग रामलीला में ‘एक शाम राष्ट्र के नाम’ राष्ट्रीय कवि वेदव्रत बाजपेयी संत तुलसी सामान से सम्मानित किया गया। मोहनलालगंज के मऊ गांव में श्री बंशी बाबा रामलीला समिति की ओर से शोभायात्रा निकाली गई। महानगर की पर्वतीय रामलीला में तीन बार लाइट जाने के कारण मंचन बाधित हुआ।
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