उत्तर प्रदेश में बिजली चोरी की दर कम हुई है, लेकिन अभी भी कई फीडरों (इलाकों) से 77 फीसदी तक चोरी हो रही है। इससे पॉवर कॉर्पोरेशन को करोड़ों रुपये के राजस्व का चूना लग रहा है। ऐसे में हर विद्युत वितरण क्षेत्र के सर्वाधिक चोरी वाले फीडर चिह्नित किए गए हैं। यहां कार्यरत जेई से लेकर एक्सईएन तक पर कार्रवाई की तैयारी है। इनसे स्पष्टीकरण मांगा गया है। इनकी संपत्ति की भी जांच की जाएगी।
रिपोर्ट के मुताबिक, गाजीपुर के नंदगंज फीडर से सर्वाधिक 77.17 फीसदी, वाराणसी के अनेई फीडर से 75.53 फीसदी, प्रतापगढ़ जोन के गढ़वारा फीडर से 74.86 फीसदी, गोरखपुर के भटनी फीडर से 72.76, चैनपुर फीडर से 71.98 फीसदी, मऊ के करहन फीडर से 54.58 फीसदी बिजली चोरी हो रही है। यही स्थिति कई अन्य फीडरों की भी है।
राजस्व नुकसान की स्थिति देखें तो बैरिया के दुबहर फीडर से हर माह सर्वाधिक 14.70 करोड़ के राजस्व का नुकसान हो रहा है। बिजली चोरी रोकने के लिए प्रदेश के 50 अधिकतम चोरी वाले फीडरों को चुना गया है। हर विद्युत वितरण निगम के 10-10 सर्वाधिक चोरी वाले फीडरों को चिह्नित किया गया है।
बिजली चोरी रोकने के लिए चिह्नित 50 फीडरों की हर दिन समीक्षा की जाएगी। इन फीडरों की आपति, बिलिंग, मीटरिंग, बकाया वसूली, राजस्व संग्रह तथा तकनीकी एवं वाणिज्यिक हानियों की निगरानी होगी।
पावर कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार गोयल ने कहा कि शत प्रतिशत बिजली चोरी रोकने और राजस्व हानियां कम करने की रणनीति अपनाई गई है। अधिकतम चोरी वाले फीडरों को चिह्नित कर कारणों को जाना जा रहा है। जहां अभियंता दोषी होंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। स्पष्टीकरण मांगा गया है।