डॉक्टर बनने का सपना पूरा करने के लिए किसी ने अपने और सास के जेवर बेचे तो किसी ने मां के गहने व पैतृक जमीन। जहां बुलाया गया, वहां पहुंचे और जालसाजों की हर मांग पूरी करते गए। लाखों रुपये खर्च करने के बाद पता चला कि जिन डिग्रियों के सहारे डॉक्टर बनकर काम कर रहे थे...सब फर्जी थीं। ऐसे डिग्रीधारक अब मुकदमे और कार्रवाई के दायरे में हैं।
अवध क्षेत्र की एक महिला ने बताया कि कोचिंग के लिए कानपुर गई थीं। वहां माल रोड निवासी विनोद गौड़ से मुलाकात हुई। हरियाणा के एक कॉलेज में बीएएमएस में दाखिले के लिए 15 लाख रुपये में बात तय हुई। इसके लिए अपने और सास के जेवर बेचे। हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की मार्कशीट भी दी।
सालभर बाद हाजिरी पूरी कराने के नाम पर आठ लाख रुपये और मांगे। कर्ज लेकर पांच लाख दिए। हालत इतनी खराब हुई कि बच्चों का दूध और स्कूल जाना बंद हो गया।
पूर्वांचल के एक युवक ने बताया कि मुंबई से हाईस्कूल व इंटर करने के बाद अहमदनगर निवासी डॉ. नीलकंठ मिश्रा से संपर्क हुआ। वह कर्नाटक और हरियाणा समेत कई राज्यों में बीएएमएस में दाखिला कराते थे। करीब 300 से ज्यादा युवाओं का दाखिला करा चुके थे। पैसे जुटाने के लिए मां के जेवर और गांव की पांच बिस्वा जमीन बिकवा दी। वर्ष 2014 में 15 लाख रुपये दिए। कुरुक्षेत्र के श्री कृष्णा आयुर्वेदिक कॉलेज में दाखिला हो गया।
पढ़ाई व परीक्षा अहमदनगर में हुई। पांच साल बाद डिग्री मिली तो यूपी के आयुर्वेदिक, यूनानी तिब्बी बोर्ड में पंजीयन करा अस्पताल खोला। अप्रैल 2025 के नोटिस के बाद अहमदनगर पहुंचा तो संस्थान बंद मिला। पुलिस में शिकायत करने पर पता चला कि डॉ. मिश्रा जेल में हैं। अब उनके सामने डिग्री, पेशे और भविष्य तीनों को लेकर संकट खड़ा है।