रायबरेली। जिला प्रशासन के अफसरों की लापरवाही से रविवार की रात एक किसान नेता की जान चली गई। डीएम दफ्तर के सामने अनशन पर बैठकर किसान नेता अमृतलाल सविता न्याय की भीख मांगता रहा, लेकिन उसे रुसवाइयां हाथ लगीं। आखिरकार वह जिंदगी की जंग हार गया। बताते हैं कि उसके खेत को जाने वाले रास्ते को एक भूमाफिया ने बंद कर दिया था। इसके अलावा कई अन्य मांगें भी थीं, जिन पर कार्रवाई नहीं की जा रही थी। किसान नेता की मौत से गुस्साए परिवारीजनों व संगठन कार्यकर्ताओं ने जमकर हंगामा किया और अफसरों को कोसा। साथ ही इस मामले में कार्रवाई की मांग की। घटना से पुलिस व प्रशासनिक अफसरों में हड़कंप मच गया। डीएम और एसपी ने रात में ही कलेक्ट्रेट पहुंचकर परिवारीजनों से घटना के बारे में जानकारी ली। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
डलमऊ कोतवाली क्षेत्र के सूरजपुर बनापार गांव निवासी एवं किसान कल्याण एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष अमृतलाल सविता ने बीती चार जून से संगठन के पदाधिकारियों के साथ कलेक्ट्रेट के सामने मांगों को लेकर धरना शुरू किया था। इसमें अमृतलाल की प्रमुख मांग थी कि उनके गांव स्थित चक (खेत) जाने वाले मार्ग को भूमाफिया ने बंद कर दिया। इससे उन्हेेें आने-जाने में परेशानी हो रही थी। एसडीएम से लेकर डीएम तक उन्होंने फरियाद पहुंचाई, लेकिन उनकी समस्या दूर नहीं हो सकी। इस पर 13 जून को अमृतलाल सविता ने अनशन शुरू कर दिया था। बताया जाता है कि रविवार देर रात अनशन पर बैठे अमृतलाल की हालत बिगड़ गई। उन्हें जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां मृत घोषित कर दिया गया। घटना की जानकारी पर रात में ही डीएम संजय कुमार खत्री व एसपी सुजाता सिंह ने मौके पर पहुंचकर परिवारीजनों से पूछताछ की। सोमवार की सुबह अमृतलाल के भाई मेवालाल, पत्नी नीलम और संगठन कार्यकर्ताओं ने जमकर हंगामा किया, जिससे कलेक्ट्रेट में अफरातफरी मच गई। हंगामे को देखते हुए पुलिस बल मौके पर बुला लिया गया। पत्नी का आरोप था कि अफसर यदि मामले को निपटा देते तो उनके पति की जान बच जाती। इस मामले में दोषी अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। पुलिस की मौजूदगी में शव का पोस्टमार्टम कराया गया।
मौत का कारण स्पष्ट नहीं, विसरा सुरक्षित : सीएमओ
सीएमओ डॉॅॅॅॅॅॅॅॅॅॅॅॅॅॅॅॅॅॅॅॅॅॅॅॅॅॅॅॅॅॅॅॅॅॅॅॅॅॅॅॅॅॅॅॅॅॅॅॅॅॅॅॅॅॅॅॅॅॅॅॅॅॅॅॅॅॅ. डीके सिंह ने बताया कि अनशन पर बैठे किसान नेता अमृतलाल सविता के शव का पोस्टमार्टम करा दिया गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में अमृतलाल की मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो पाया है। विसरा सुरक्षित कर लिया गया है। विसरा जांच के बाद ही अब अमृतलाल की मौत की सही वजह सामने आएगी।
पीड़ित परिवार को पांच लाख रुपये की मदद
डीएम संजय कुमार खत्री ने अमृतलाल सविता के परिवारीजनों को दस लाख रुपये और आवास बनवाए जाने का एलान किया है। डीएम ने पांच लाख रुपये की मदद पीड़ित परिवार को सौंपी। साथ ही पांच लाख रुपये और दिलाने का भरोसा दिया। एडीएम वित्त एवं राजस्व डॉ. राजेश प्रजापति ने बताया कि पीड़ित परिवार को दस लाख रुपये व आवास की आर्थिक मदद दी जाएगी। इसमें पांच लाख रुपये की मदद दे दी गई है।
भूमिधरी जमीन से मांग रहे थे रास्ता
अमृतलाल सविता दूसरे व्यक्ति की भूमिधरी जमीन से रास्ता मांग रहे थे। इसी मांग को लेकर अनशन पर बैठे थे। हालत बिगड़ने पर उन्हें जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनकी मौत हो गई। मामले की जांच कराई जा रही है। जांच के बाद मामले में उचित कार्रवाई होगी।
- शशिशेखर सिंह, अपर पुलिस अधीक्षक
निस्तारण कराने की बनी थी सहमति
अमृतलाल सविता ने छह जून को शिकायत की थी कि भूमाफिया रामलखन तिवारी ने उनके चक को जाने वाले मार्ग को बंद कर दिया, जिसे खोलवाया जाए। इस प्रकरण में नायब तहसीलदार डलमऊ की अध्यक्षता में सात जून को टीम भेजी गई, जिसने मौके की जांच कर रिपोर्ट सौंप दी। इस पर 12 जून को फिर शिकायतकर्ता की बैठक सिटी मजिस्ट्रेट एवं एसडीएम डलमऊ के साथ कराई गई। इसमें इस बात पर सहमति बनी कि पिछली सीमांकन रिपोर्ट उपलब्ध कराने पर पैमाइश कराकर शिकायत का निस्तारण करा दिया जाएगा। शिकायतकर्ता अमृतलाल सविता की 17 जून को कलेक्ट्रेट परिसर में अस्वाभाविक मृत्यु हो गई, जिस पर उन्होंने मृतक के परिवारीजनों को पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता तत्काल प्रदान की है।
- संजय कुमार खत्री, जिलाधिकारी