फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रोज फुंक रहे ते पांच-छह ट्रांसफार्मर, उपभोक्ता बेहाल

विज्ञापन
विज्ञापन
रोज फुंक रहे पांच-छह ट्रांसफार्मर, उपभोक्ता बेहाल
विज्ञापन


अंबेडकरनगर। जिले में प्रतिदिन पांच-छह ट्रांसफार्मरों के ओवरलोडिंग से फुंकने से हजाराें उपभोक्ताओं की मुश्किलें बढ़ गई हैं। विभिन्न इलाकों में प्रतिदिन अलग-अलग क्षमता के ट्रांसफार्मर जवाब दे रहे हैं। ऐसे में औसतन 25 हजार से अधिक आबादी को गर्मी में बिना बिजली के रात गुजारनी पड़ती है।

पिछले 18 दिन में जिलेभर में कुल 95 ट्रांसफार्मर फुंके हैं। इसका सबसे बड़ा कारण ट्रांसफार्मरों का ओवरलोड होना माना जा रहा है। लंबे समय से ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाने की मांग को नजरअंदाज करने से ही ये समस्या दूर नहीं हो पा रही है।
विज्ञापन


गर्मी शुरू होने के साथ ही विद्युत उपभोक्ताओं की मुश्किलें चरम पर पहुंचने लगी हैं। भीषण गर्मी में बिजली की मांग बढ़ने के चलते ओवरलोड ट्रांसफार्मरों के फुंकने का दौर शुरू हो गया है। शायद ही कोई ऐसा दिन गुजरता हो, जब औसतन अलग-अलग क्षमता के पांच-छह ट्रांसफार्मर न फुंकते हों।

लंबे समय से ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाने की मांग को नजरअंदाज करने का ही नतीजा है कि विगत 18 दिन में विभिन्न क्षमता के 95 ट्रांसफार्मर अलग-अलग क्षेत्रों में फुंक गए।

इसमें 10 केवीए के 24, 16 केवीए के नौ, 25 केवीए के 37, 63 केवीए के 19, 100 केवीए के दो, 250 केवीए के तीन, 400 केवीए का एक ट्रांसफार्मर शामिल है। इसके चलते जिले के विभिन्न क्षेत्रों में प्रतिदिन औसतन 25 हजार आबादी को भीषण गर्मी में बिना बिजली के रात काटनी पड़ती है।

ट्रांसफार्मरों के फुंकने का एक बड़ा कारण उनका ओवरलोड होना है। दरअसल जिले के शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित ज्यादातर ट्रांसफार्मर ओवरलोड चल रहे हैं। क्षमता से अधिक भार होने के चलते ही गर्मी में दबाव बढ़ने पर अब ट्रांसफार्मर जवाब दे रहे हैं।

इसका खामियाजा उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है। ट्रांसफार्मरों के निर्माण में गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखना भी एक कारण है, जिससे विद्युत आपूर्ति प्रभावित हो रही है।

पावर कॉर्पोरेशन के अनुसार मौजूदा समय में जिले को 38 से 40 मेगावाट बिजली की आवश्यकता है, लेकिन औसतन 35 मेगावाट बिजली ही मिल रही है। इसके चलते ही अलग-अलग क्षेत्रों में कटौती का दौर भी शुरू हो गया है।

गर्मी से पहले आपूर्ति में कोई खास समस्या नहीं होती, लेकिन अब गर्मी शुरू होते ही बिजली की खपत बढ़ गई है। एसी व कूलर का प्रयोग बड़े पैमाने पर हो रहा है। नतीजतन बिजली की खपत बढ़ी है। इसमें भी औसतन पांच मेगावाट बिजली कम मिलने से उपभोक्ताओं को और ज्यादा मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
विज्ञापन


अधिशासी अभियंता विद्युत एके यादव का कहना है कि, ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। कई जगह ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाई गई है। उपकेंद्रों में भी सुधार किया जा रहा है, जिससे आपूर्ति व्यवस्था बेहतर हो सके।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें