महसी/राजीचौराहा। घाघरा की लहरों का कहर जिंदगी पर भारी पड़ रहा है। जलस्तर में कमी के साथ ही नदी तेज कटान कर रही हैं। महसी और कैसरगंज में 21 मकान गुरुवार को नदी में समाहित हो गए।
280 बीघा खेत भी नदी में समाहित हुए हैं। गोलागंज ग्राम पंचायत भी घाघरा नदी के निशाने पर आ गया है। यहां से लोगों ने मकान उजाड़कर पलायन शुरू कर दिया है। अफरातफरी की स्थिति है।
घाघरा की लहरों का कहर थम नहीं रहा है। बाढ़ लगभग खत्म हो गई है लेकिन अब कम हो रहे जलस्तर से नदी की कटान काफी तेज हो गई है।
महसी और कैसरगंज तहसील क्षेत्र में नदी की लहरें मुसीबत का सबब बनी हुई हैं। महसी के चुरईपुरवा में नदी की लहरों ने कटान करते हुए तीरथ, बालकराम, बलदेव, जोगी, मुन्ना, ननकऊ, कुन्ने, शिवकुमार, लालता समेत 12 लोगों के आशियानों को लील लिया है।
गोड़हिया नंबर तीन में ननकुन्ना, मालिक, हृदयराम समेत नौ लोगों के आशियानों को घाघरा की लहरों ने निशाना बनाया है। गृहस्थी का आधा सामान मकान के साथी नदी में समाहित हो गया।
पीड़ित परिवार बेलहा-बेहरौली तटबंध पर शरण लिए हुए हैं। राहत व बचाव कार्य महज कागजों पर ही दिख रहे हैं। वहीं बाढ़ तो खत्म हो गई है। लेकिन 27 ग्राम पंचायतों में बाढ़ का पानी भरा हुआ है। फसलें सड़ गई हैं।
मकान के साथ खेती योग्य जमीन को भी घाघरा की लहरें काट रही हैं। महसी के चुरईपुरवा, गोलागंज, पचदेवरी, कहारनपुरवा, तूलापुर, सिसैयाचूड़मणि के अलावा कैसरगंज में मझारा तौकली, गोड़हिया नंबर दो व गोड़हिया नंबर एक के निकट कटान काफी तेजी से हो रही है।
गोलागंज गांव की ओर नदी की लहरें धीरे-धीरे बढ़ रही हैं, जिससे ग्राम पंचायत के प्रधानपुरवा और कहारनपुरवा गांव के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है।
105 नावों से पहुंचायी जा रही सहायता
महसी व कैसरगंज क्षेत्र के 27 ग्राम पंचायतों में बाढ़ है। पानी धीरे-धीरे खिसक रहा है। गांव में फंसे लोगों को 105 नावों की मदद से राहत सहायता पहुंचायी जा रही है।
हालात आगामी दो से तीन दिन में सामान्य होने की उम्मीद है। 41 बाढ़ चौकियों पर लंगर का संचालन किया जा रहा है। राजस्वकर्मियों की टीम भी भ्रमण कर रही है। महसी और कैसरगंज क्षेत्र में बाढ़ व कटान से अब तक 275 मकान ढह चुके हैं। इनमें 11 पक्के मकान भी शामिल हैं।
-संतोष कुमार राय, अपर जिलाधिकारी