कुकरैल परियोजना से पर्यावरण को संभावित गंभीर नुकसान को लेकर लखनऊ के पर्यावरण कार्यकर्ता एवं एडवोकेट आलोक सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में आपत्तियां उठाई थीं। अगस्त 2025 में अदालत ने मामले की जांच के लिए सीईसी से रिपोर्ट मांगी थी। इसके बाद सीईसी की रिपोर्ट, याचिकाकर्ताओं की आपत्तियां, राज्य सरकार का जवाब और अन्य हस्तक्षेप-आवेदन अदालत के समक्ष आए। विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों पर विचार करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी शर्तों के साथ अनुमति दी है।
इन नियमों का भी करना होगा पालन
नाइट सफारी में ऐसी कम रोशनी का इस्तेमाल होगा, जिससे वन्यजीवों को परेशानी न हो और जंगल में तेज रोशनी न फैले। बहुत तेज या दूर तक फैलने वाली लाइटें (हाई-ल्यूमेन/स्काई-ग्लो) लगाने पर रोक रहेगी।
यह है सीईसी: सीईसी पर्यावरण, वन और वन्यजीव मामलों पर सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के अनुपालन की निगरानी करती है, क्षेत्रीय निरीक्षण करती है और स्वतंत्र तथ्य, जांच रिपोर्ट सर्वोच्च न्यायालय को प्रस्तुत करती है। वर्ष 2023 में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर जारी पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की अधिसूचना के जरिये इसे वैधानिक दर्जा दिया गया।