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लोकबंधु अस्पताल: भर्ती होने के बाद एक घंटे तक नहीं आए डॉक्टर, मरीज की मौत... हंगामा, डॉक्टर ने की धक्कामुक्की

Sun, 19 Jul 2026 09:41 AM IST
Ishwar Ashish Bhartiya अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

मरीज की मौत से नाराज परिजनों ने मेडिकल अफसर पर लापरवाही का आरोप लगाकर जमकर हंगामा किया। इससे नाराज डॉक्टर ने तीमारदारों के साथ धक्कामुक्की की। मरीज के बेटे ने एफआईआर दर्ज करने के लिए तहरीर दी है।
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लोकबंधु अस्पताल।
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विस्तार
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लोकबंधु अस्पताल में एक बार फिर मरीजों की सुरक्षा और इलाज व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यहां शुक्रवार रात इलाज के अभाव में मरीज की मौत हो गई। नाराज परिजनों ने इमरजेंसी मेडिकल अफसर पर लापरवाही का आरोप लगाकर जमकर हंगामा किया। इससे नाराज डॉक्टर ने तीमारदारों के साथ धक्कामुक्की की।

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परिजनों ने इस पूरी घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल किया है। पुलिस ने परिजनों को शांत कराया। बेटे ने एफआईआर दर्ज करने के लिए तहरीर दी है। आलमबाग स्थित अलीनगर सुनहरा निवासी जगजीवन (65) को सांस लेने में तकलीफ थी। बेटा दीपक पिता को शुक्रवार रात साढ़े सात बजे इमरजेंसी ले गए थे। वहां परचा बनने में आधा घंटा लग गया।

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इस दौरान मरीज की सांस उखड़ रही थी। ईएमओ ने परचे पर इंजेक्शन लिखकर ऑक्सीजन लगा दिया, मगर मरीज की हालत में सुधार नहीं हुआ। दीपक का आरोप है कि तीन बार डॉक्टर से गुहार लगाई, मगर सुनवाई नहीं हुई। करीब एक घंटे बाद डॉक्टर देखने आए। रात करीब साढ़े नौ बजे पिता की मौत हो गई। अस्पताल के निदेशक डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि जांच के आदेश दिए गए हैं। लापरवाही के आरोप सही मिले तो कार्रवाई की संस्तुति होगी।

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पहले प्रसव के दौरान फर्श पर गिरने से नवजात की जा चुकी है जान

अस्पताल में इलाज में लापरवाही से मरीज की मौत का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले 6 जुलाई को प्रसव के दौरान फर्श पर गिरने से नवजात की मौत हो चुकी है। आशियाना निवासी गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा होने पर अस्पताल लाया गया था, लेकिन परिजनों के बार-बार अनुरोध के बावजूद समय पर भर्ती नहीं किया गया। वार्ड में जिम्मेदार डॉक्टर और स्टाफ की अनुपस्थिति में महिला ने वहीं बच्चे को जन्म दे दिया। नवजात सीधे पक्के फर्श पर गिरा और सिर में गंभीर चोट लगने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इस घटना के बाद डिप्टी सीएम के निर्देश पर जांच हुई, जिसमें दो संविदा नर्सों को बर्खास्त किया गया और वरिष्ठ महिला डॉक्टर को नोटिस जारी किया गया।

टॉर्च की रोशनी में चला था इलाज
इसी अस्पताल की व्यवस्थाओं पर उस समय भी सवाल उठे थे, जब 10 जुलाई को बिजली आपूर्ति बाधित होने के दौरान जनरेटर और इनवर्टर बैकअप भी जवाब दे गया था। मजबूरी में डॉक्टरों को मोबाइल की टॉर्च की रोशनी में गंभीर मरीजों का इलाज करना पड़ा। एक्सरे, सीटी स्कैन और अल्ट्रासाउंड जैसी जांच ठप हो गई थी, जबकि वार्डों में एसी बंद होने से मरीज और तीमारदार भीषण गर्मी और उमस में परेशान रहे थे।
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