अस्पताल में इलाज में लापरवाही से मरीज की मौत का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले 6 जुलाई को प्रसव के दौरान फर्श पर गिरने से नवजात की मौत हो चुकी है। आशियाना निवासी गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा होने पर अस्पताल लाया गया था, लेकिन परिजनों के बार-बार अनुरोध के बावजूद समय पर भर्ती नहीं किया गया। वार्ड में जिम्मेदार डॉक्टर और स्टाफ की अनुपस्थिति में महिला ने वहीं बच्चे को जन्म दे दिया। नवजात सीधे पक्के फर्श पर गिरा और सिर में गंभीर चोट लगने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इस घटना के बाद डिप्टी सीएम के निर्देश पर जांच हुई, जिसमें दो संविदा नर्सों को बर्खास्त किया गया और वरिष्ठ महिला डॉक्टर को नोटिस जारी किया गया।
टॉर्च की रोशनी में चला था इलाज
इसी अस्पताल की व्यवस्थाओं पर उस समय भी सवाल उठे थे, जब 10 जुलाई को बिजली आपूर्ति बाधित होने के दौरान जनरेटर और इनवर्टर बैकअप भी जवाब दे गया था। मजबूरी में डॉक्टरों को मोबाइल की टॉर्च की रोशनी में गंभीर मरीजों का इलाज करना पड़ा। एक्सरे, सीटी स्कैन और अल्ट्रासाउंड जैसी जांच ठप हो गई थी, जबकि वार्डों में एसी बंद होने से मरीज और तीमारदार भीषण गर्मी और उमस में परेशान रहे थे।