स्वाइन फ्लू (इंफ्लुएंजा एच1एन1 वायरस) से शुक्रवार को पांच मरीजों की मौत हो गई। इनमें से तीन महिलाएं, एक युवक और एक बच्चा है। एक महिला व युवक की मौत एसजीपीजीआई में जबकि, सीतापुर निवासी एक बच्चे की मौत केजीएमयू हुई है।
इसके अलावा केजीएमयू के गांधी वार्ड में वेंटीलेटर यूनिट और ट्रॉमा सेंटर के पल्मोनरी आईसीयू में एक महिला की स्वाइन फ्लू से मौत हो गई। युवक का लगभग एक माह से एसजीपीजीआई में इलाज चल रहा था।
जबकि बच्चे का यूरोलॉजी विभाग में ऑपरेशन हुआ था अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान वह स्वाइन फ्लू की चपेट में आ गया। इसके अलावा शुक्रवार को 63 नए मरीजों में संक्रमण की पुष्टि हुई है।
ये बीते एक माह में सबसे बड़ी संख्या है। इसी के चलते शुक्रवार को मरीजों का आंकड़ा 422 पहुंच गया है। एसजीपीजीआई और केजीएमयू में वेंटिलेटर पर भर्ती पांच मरीजों की हालत नाजुक बनी हुई है।
बेकाबू स्वाइन फ्लू ने पांच और मरीजों की जान ले ली। इनमें से आलमबाग के 29 वर्षीय युवक को सर्दी-जुकाम की शिकायत के बाद आलमबाग के अवध अस्पताल में 25 जनवरी को भर्ती कराया गया था।
जारी है मौतों का सिलसिला
कई दिनों के इलाज के बाद हालत नहीं सुधरी तो उसके गले के स्राव की जांच में पता चला कि उसे स्वाइन फ्लू है। सीएमओ की टीम ने 28 जनवरी को अवध अस्पताल पहुंचकर उसी दिन पीजीआई शिफ्ट कराया था। इनमें से एक मरीज की हालत सुधरी तो उसे डिस्चार्ज कर दिया गया। जबकि दूसरे की शुक्रवार को लगभग एक माह तक इलाज के बाद मौत हो गई।
एसजीपीजीआई के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक प्रो. पीके सिंह ने बताया कि सुबह करीब नौ बजे युवक की मृत्यु हुई। इसके अलावा शनिवार आधी रात को एक महिला मरीज ने भी एसजीपीजीआई में दम तोड़ दिया।
जबकि केजीएमयू में भर्ती एक पांच साल के बच्चे की भी स्वाइन फ्लू से मौत हो गई। सीतापुर निवासी इस बच्चे को छह फरवरी को पेशाब में दिक्कत के बाद केजीएमयू में भर्ती कराया गया था। ऑपरेशन के बाद उसे तेज बुखार और सर्दी जुकाम की शिकायत हो गई। जांच में पता चला कि उसे स्वाइन फ्लू हो गया है।
इलाज के बावजूद शुक्रवार को उसकी मौत हो गई। उधर शुक्रवार को केजीएमयू के गांधी वार्ड की वेंटीलेटर यूनिट में भर्ती 23 वर्षीय युवती की मौत हो गई। उसे दो दिन पहले वहां भर्ती कराया गया था।
इसके अलावा शुक्रवार को गंभीर हालत में ट्रॉमा सेंटर पहुंची एक महिला की मौत स्वाइन फ्लू से हो गई। इस महिला को वेंटीलेटर पर ही किसी अन्य अस्पताल से ट्रॉमा सेंटर में रेफर किया गया था। जहां उसकी स्वाइन फ्लू की जांच करायी गई। जांच में उसके स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई।
63 नए मरीजों के साथ आंकड़ा हुआ 422
राजधानी में शुक्रवार को स्वाइन फ्लू के 63 नए मरीज सामने आए हैं। इसी के साथ कुल मरीजों की संख्या 422 हो गई। संक्रमित मरीजों में 28 बच्चे हैं। अब तक राजधानी का हर इलाका इंफ्लुएंजा एच1एन1 वायरस की चपेट में आ चुका है। सीएमओ डॉ. एसएनएस यादव ने बताया कि सभी नए मरीजों को रैपिड रिस्पांस टीम टेमीफ्लू दवा दे रही है।
वायरस से बचाव के लिए पीड़ितों के परिवारीजनों की काउंसिलिंग की जा रही है। जिससे वायरस को फैलने से रोका जा सके। सभी लोग समझदारी दिखाएं और सावधानी बरतें तो वायरस को फैलने से रोका जा सकता है। लापरवाही या गड़बड़ी करने वाले किसी अस्पताल को छोड़ा नहीं जाएगा।
स्वास्थ्य विभाग की शुरुआती लापरवाही पड़ी भारी
स्वाइन फ्लू को काबू करने में स्वास्थ्य विभाग ने शुरुआत में जो लापरवाही की वह अब भारी पड़ रही है। अवध अस्पताल में मरीज का इलाज चलता रहा है इसकी सूचना सीएमओ को नहीं दी गई। अस्पताल में न तो आइसोलेशन वार्ड की व्यवस्था थी और न ही जरूरी दवाएं। जब मरीज के पॉजिटिव होने की जानकारी मिली तब स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया।
सीएमओ की टीम के डॉ. अकमल और डॉ. शक्ति आनंद ने दो मरीजों को 28 जनवरी को शिफ्ट कराया। इसके बाद अस्पताल को नोटिस दिया गया। इसके बाद सीएमओ कार्यालय को नोटिस का जवाब मिला कि नहीं ये किसी भी अधिकारी को ध्यान नहीं है।