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सरयू पुल के बीच पड़ी दरार

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करनैलगंज (गोंडा)। अभी दो माह पूर्व घाघरा नदी पर बने संजय सेतु की प्लेट की खराबी से करीब एक हफ्ते तक गोंडा-लखनऊ मार्ग पर आवागमन बाधित रहा। ठीक उसी तरह करनैलगंज के सरयू पुल की स्थिति कभी भी हो सकती है। गोंडा जिले को प्रदेश की राजधानी से जोड़ने के लिए एक मात्र गोंडा-लखनऊ मार्ग पर करनैलगंज से तीन किलोमीटर पश्चिम सरयू नदी पर बना सरयू पुल मरम्मत के अभाव में जर्जर हो गया है। यहां पुल की कोठियों के बीच पड़ीं दरारें लगातार बढ़ती जा रही हैं, जिसे संबंधित विभाग नजरअंदाज कर रहा है। वहीं, इस मार्ग पर निकलने वाले भारी व ओवरलोड वाहनों से जॉइंट पर पड़ने वाले झटके पुल को झकझोर रहे हैं, जिससे कभी भी पुल के बीच खराबी या अन्य गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है।
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यह सरयू पुल घाघरा पुल से करीब पांच वर्ष पूर्व का बना हुआ है। इस पुल का वर्ष 1960 से लेकर 1962 तक निर्माण हुआ तथा 1963 में इस पर आवागमन शुरू हो गया। प्रदेश सरकार की नीतियों के मुताबिक किसी भी पुल की उम्र 50 वर्ष ही मानी गई है, जबकि यह पुल अपनी उम्र को पार कर चुका है। फिर भी लोक निर्माण विभाग, शासन, प्रशासन इस पुल की मरम्मत एवं रखरखाव के लिए कोई ध्यान नहीं दे रहा है, जिससे स्थिति कभी भी बिगड़ सकती है। इस पुल की कोठियों के बीच पड़ीं दरारें लगातार बढ़ती जा रही हैं। पुल के जॉइंट को न भरे जाने से वाहनों का झटका पुल के बीचोबीच बनी कोठियों पर पड़ रहा है। जिससे उस पुल पर होने वाला कंपन लगातार तेजी से बढ़ रहा है। यही नहीं पुल के नीचे जो प्लेट हैं व बैरिंग लगाई गई हैं, उनकी मरम्मत या उसकी आयलिंग, ग्रीसिंग भी कई वर्षों से नहीं हुई है। फिर भी संबंधित विभाग आंख और कान बंद कर बैठा है।


सरयू पुल की मरम्मत और उस पर होने वाले व्यय को लेकर शासन को रिपोर्ट भेजी जा चुकी है। मरम्मत का धन प्राप्त होने पर ही पुल की मरम्मत व अन्य कार्य कराए जाएंगे।
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- दिनेश कुमार कुरील, अधिशासी अभियंता पीडब्ल्यूडी
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