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मजाक बनी शिक्षा व्यवस्था, स्कूलों की हालत पतली

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मजाक बनी शिक्षा व्यवस्था, स्कूलों की हालत पतली
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रायबरेली। ये दो केस बताने के लिए काफी हैं कि जिले में शिक्षा व्यवस्था किस तरह मजाक बनकर रह गई है। स्कूलों की हालत पतली है। प्रसाधन बदहाल हैं। उनके दरवाजे और खिड़की गायब हैं। फर्श उखड़ गया है। बच्चों के हाथों में पुरानी किताबें थमा दी गई हैं। पर यह सब देखने वाला कोई नहीं है। बस स्कूल चलो अभियान के तहत शिक्षा विभाग के अधिकारी वाहवाही करने में जुटे हैं। स्कूलों की हालत सुधार के लिए उनकी तरफ से कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जिले के 2600 सरकारी स्कूलों में सवा दो लाख बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। नया शिक्षासत्र की शुरुआत हो गई है, लेकिन स्कूलों में जो अव्यवस्था व्याप्त है, उसे दूर करने के प्रयास नहीं किए गए। 50 फीसदी से अधिक स्कूलों की यही हालत है, जहां पर प्रसाधन बदहाल हैं। खिड़की, दरवाजे गायब हैं। रात के वक्त शिक्षा के इन मंदिरों में अराजकतत्वों का जमावड़ा लगता है। आखिर सवाल उठता है कि स्कूलों की बेहतरी के लिए हर साल आने वाला करोड़ों रुपये का बजट कहां समा रहा है। इसका जवाब किसी के पास नहीं है। सिर्फ अधिकारी व कर्मचारी शिक्षा की बेहतरी के डींगे मार रहे हैं।
स्कूल में अराजकतत्वों का रहता जमावड़ा
प्राथमिक स्कूल जगतपुर का हाल बेहाल है। खिड़कियां टूटी पड़ी हैं। एक कमरे में तो लोगों के नित्यक्रिया जाने से उसे बंद कर दिया गया है। प्रसाधन बदहाल है। उसके दरवाजे गायब हैं। बाउंड्रीवाल तक सही ढंग से नहीं बनवाई गई है। रात के वक्त अराजकतत्वों का स्कूल में जमावड़ा रहता है। बावजूद इस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। बीईओ अखिलानंद राय का कहना है कि जल्द इसमें सुधार किया जाएगा।
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स्कूल में फर्श पूरी तरह से उखड़ गया
खीरों ब्लॉक क्षेत्र के प्राथमिक जेनापुर मजरे खीरों की स्थिति दयनीय है। स्कूल के अंदर की फर्श पूरी तरह से उखड़ चुका है। किसी कक्ष में जर्जर दरवाजे हैं तो किसी कक्ष में दरवाजे नहीं हैं। प्रसाधन बदहाल है। उसके दरवाजे गायब हैं। वर्ष 2012 में बना यह स्कूल जर्जर अवस्था में है, जिसकी मरम्मत नहीं कराई जाती है। इसको लेकर अभिभावकों में नाराजगी रहती है। बावजूद इस पर अफसर ध्यान नहीं दे रहे हैं। ऐसे में यहां पढ़ने आने वाले बच्चों को परेशानी से दो चार होना पड़ रहा है।
बच्चे बोले, पढ़ने को दी गई पुरानी किताबें
प्राथमिक स्कूल जगतपुर में पढ़ने वाले कक्षा पांच के छात्र रोहित, कक्षा चार के छात्र कार्तिकेय, कक्षा दो की छात्रा खुशी, कक्षा एक के छात्र आदर्श का कहना था कि उन्हें पढ़ने के लिए नई किताबों के बजाय पुरानी किताबें दी गई हैं। बच्चों का कहना है कि स्कूल के सामने पानी भर जाता है। इससे आने जाने में भी दिक्कत हो रही है।
कनेक्शन तो दिए गए, पर नहीं रहती बिजली
जिले के सरकारी स्कूलों में कनेक्शन दे दिए गए हैं। बावजूद बिजली कम रहती है। इससे कक्ष के अंदर अंधेरा रहता है। यही नहीं कई स्कूलों में तारों की कराई गई वायरिंग उखड़ गई है। इसे भी अफसर नहीं दिखवा रहे हैं। पावर कॉर्पोरेशन के अधीक्षण अभियंता पंकज श्रीवास्तव का कहना है कि सरकारी स्कूलों को बिजली कनेक्शन दे दिया गया है।
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जहां पर जो समस्या है, उन स्कूलों को चिह्नित कराया जा रहा है। जल्द ही खिड़की, दरवाजे लगवाने के साथ प्रसाधन ठीक कराए जाएंगे। स्कूलों में कनेक्शन करा दिए गए हैं। शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी जाएगी।- राजेंद्र सिंह, बीएसए
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