जहां प्रदेश का ट्री कवर (वृक्षावरण) 100 वर्ग किलोमीटर घटा है वहीं फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया (एफएसआई) की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है फॉरेस्ट कवर (वनावरण) में 126.65 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि हुई है। लेकिन यह वृद्धि वर्ष 2017 के सापेक्ष आधे से भी कम है। वर्ष 2017 में जारी एफएसआई की रिपोर्ट में प्रदेश के फॉरेस्ट कवर में 278 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि दर्ज की गई थी।
वनावरण में .06 फीसदी की वृद्धि
रिपोर्ट के मुताबिक, यूपी में वर्तमान में 14805.65 वर्ग किलोमीटर फॉरेस्ट कवर है, जोकि यूपी के कुल क्षेत्रफल का 6.15 प्रतिशत है। वर्ष 2017 में यूपी का वनावरण 14679 वर्ग किलोमीटर था, जोकि कुल क्षेत्रफल का 6.09 प्रतिशत बना। इस तरह वनावरण में .06 फीसदी की मामूली बढ़त दर्ज की गई है।
वन विभाग के अधिकारी मानते हैं कि जंगल के लिए निर्धारित भूमि का अन्य कामों में इस्तेमाल, सड़कों व रेलवे परियोजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर पेड़ काटने और विभागों के पौधों की सुरक्षा पर ध्यान न देने के कारण यह स्थिति पैदा हुई है। इन खामियों को दूर करने और स्थिति में बदलाव लाने के लिए व्यापक सुधारों की आवश्यकता है।
यूपी का कुल क्षेत्रफल : 240928 वर्ग किलोमीटर
यूपी का फॉरेस्ट कवर : 14805.65 वर्ग किलोमीटर
प्रदेश में कब-कितने पौधे रोपे गए
वर्ष संख्या
2013 49082413
2014 60021680
2015 43561837
2016 57539922
2017 50000000
2018 110000000
2019 220000000
126.65 वर्ग किलोमीटर बढ़ा वृक्षावरण, लेकिन...
एफएसआई के मानकों के अनुसार, अगर एक हेक्टेयर से ज्यादा भूमि में छत्र घनत्व (पेड़ों से ढका स्थान) 10 फीसदी या उससे ज्यादा है तो वह ढका स्थान फॉरेस्ट कवर (वनावरण) माना जाएगा। वहीं, भूमि एक हेक्टेयर से कम होने पर जो स्थान पेड़ों से ढका (छत्र घनत्व) होगा, वह ट्री कवर कहलाएगा। भले ही कागजों में उस जमीन का स्टेटस (वैधानिक स्थिति) कुछ भी क्यों न हो।