मंगल देव गिरि/प्रेमनाथ मिश्र
बलरामपुर। गौरा चौराहा क्षेत्र के पास राप्ती नदी के पिपराघाट पुल का निर्माण 50 साल से किया जा रहा है। उतरौला व तुलसीपुर तहसीलों को जोड़ने के लिए कई सालों से पिपराघाट पुल निर्माण की मांग हो रही है। वर्ष 2011 में 54 करोड़ रुपये लागत से पुल का निर्माण शुरू हुआ लेकिन अभी तक पुल चालू नहीं हो सका है। क्षेत्र के सात लाख लोगों को 60 किलोमीटर का चक्कर काटने की मजबूरी है। आक्रोशित क्षेत्रवासियों ने शासन-प्रशासन पर समस्या के प्रति उपेक्षा बरतने का आरोप लगाया है। क्षेत्रवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही एप्रोच का निर्माण कराकर पिपराघाट पुल चालू नहीं कराया गया तो उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
दो बार हुआ पुल निर्माण कराने का शिलान्यास
राप्ती नदी के पिपराघाट पुल का निर्माण कराने के लिए दो बार शिलान्यास किया गया। उत्तर प्रदेश के तत्कालीन सीएम स्व. नारायण दत्त तिवारी ने वर्ष 1970 में राप्ती नदी में नाव डूबने से कई लोगों की मौत के बाद पुल निर्माण कराने का निर्णय लिया। पुल का शिलान्यास होने के बाद दो पिलर का निर्माण कराया गया। बजट न मिलने से पुल निर्माण रोक दिया गया। क्षेत्र के लोगों में पिपराघाट पुल निर्माण को लेकर मांग भी जोरशोर से चलती रही।
प्रदेश की तत्कालीन सीएम मायावती ने समस्या को संज्ञान में लेते हुए वर्ष 2011 में पिपराघाट पुल निर्माण कराने का निर्णय लिया। नौ अक्तूबर 2011 को पुन: शिलान्यास करके पिपराघाट पुल निर्माण के लिए 54 करोड़ रुपये की धनराशि जारी कर दिया। पुल का निर्माण पूरा हो चुका है। पुल के दोनों तरफ तटबंधों व एप्रोच का निर्माण न होने से अभी तक पिपराघाट पुल पर आवागमन शुरू नहीं हो सका है।
दो धार्मिक स्थलों की दूरी होगी कम
पिपराघाट पुल चालू होने से दो तहसीलों के साथ-साथ दो धार्मिक स्थलों की भी दूरी काफी कम हो जाएगी। धार्मिक स्थल अयोध्या में हिन्दुओं के आराध्य भगवान श्रीराम की जन्मस्थली और शक्तिपीठ देवीपाटन मंदिर में विराजमान मां पाटेश्वरी का दर्शन करने के लिए श्रद्घालुओं को चक्कर नहीं काटना पड़ेगा। पिपराघाट पुल चालू होने से करीब 60 किलोमीटर की दूरी कम हो जाएगी। इस क्षेत्र से सटे बस्ती, फैजाबाद व गोंडा जिले के लोगों को दोनों धार्मिक स्थलों पर अपने आरध्य का आसानी से दर्शन कर सकेंगे।
क्षेत्र के लोगों को बस नाव का ही सहारा
क्षेत्रवासी अखिलेश सिंह, लालधर जायसवाल, कमलेश यादव व सुनील शुक्ल आदि का कहना है कि राप्ती नदी के दोनों तरफ खेत होने के चलते हर महीने में नाव से आनेजाने की विवशता है। राप्ती नदी के पिपराघाट पुल का निर्माण पूरा न होने से काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई बार आंदोलन व मांग के बाद भी शासन-प्रशासन की तरफ से समस्या का निराकरण नहीं कराया गया। क्षेत्रवासियों ने संघर्ष समिति का गठन करके पिपराघाट पुल को चालू कराने के लिए आंदोलन करने की चेतावनी दी है।
डीएम कृष्ण करुणेश ने बताया कि एक्सईएन पीडब्ल्यूडी निर्माण खंड हेमराज के माध्यम से पिपराघाट पुल के दोनों तरफ एप्रोच का निर्माण कराने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। शासन से बजट मिलने के बाद तत्काल एप्रोच व तटबंधों का निर्माण कराकर राप्ती नदी के पिपराघाट पुल को चालू करा दिया जाएगा।