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लविवि में पीएचडी की 525 सीटें!

Thu, 14 Mar 2019 01:27 AM IST
sahaj sahaj न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
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डेमो - फोटो : डेमो
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लगभग दो दिन मंथन के बाद लखनऊ विश्वविद्यालय प्रशासन ने पीएचडी की लगभग 525 सीटें निर्धारित की हैं। इन्हें सीट मैट्रिक्स बनाकर परीक्षा परिणाम जारी करने के लिए प्रवेश विभाग को भेज दिया है। हालांकि िववि प्रशासन के निर्णय से लखनऊ विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (लूटा) नाराज है और इसे शिक्षकों के साथ विश्वासघात बताते हुए इस मुद्दे पर न्यायालय की शरण में जाने की चेतावनी दी है।
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विश्वविद्यालय में पीएचडी अध्यादेश 2018 लागू करने और उसके आधार पर प्रवेश कराने को लेकर परिसर में लगभग तीन महीने से खींचतान चल रही है। इस पर अंतिम रूप से सीटों के निर्धारण के लिए विवि प्रशासन ने प्रति कुलपति प्रो. राजकुमार सिंह की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय कमेटी का गठन किया था। मंगलवार को लगभग 8 घंटे कमेटी ने सीटों पर मंथन किया। इसमें तय फार्मूले के आधार पर बुधवार को भी दिनभर चले मंथन के बाद शिक्षकों के लिए पीएचडी की लगभग 525 सीटें तय की गईं, जबकि विश्वविद्यालय ने प्रवेश परीक्षा 648 सीटों पर कराई थी। िववि प्रशासन ने 2018 के नए नियमों का हवाला देते हुए उन शिक्षकों को पीएचडी सीटें नहीं देने का निर्णय लिया है जो अगले तीन साल में सेवानिवृत्त होने वाले हैं। वहीं, पहले प्रत्येक शिक्षक से उनके पांच रिफरीड जर्नल भी मांगे गए थे, किंतु विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसमें राहत दी है। जिन शिक्षकों के पांच रिफरीड जर्नल नहीं भी थे, उन्हें भी सीटें दी हैं। हालांकि इसे लेकर शिक्षकों के बीच काफी गतिरोध है।

प्रदेश का पहला विश्वविद्यालय है जहां नए नियमों से हो रहा प्रवेश  
बता दें कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने नवंबर में नए पीएचडी अध्यादेश को हरी झंडी मिलने के बाद पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया शुरू की थी। विश्वविद्यालय प्रशासन ने दावा किया था कि वह प्रदेश का पहला विश्वविद्यालय है जहां नए नियमों के अनुसार प्रवेश हो रहा है। लविवि ने प्रवेश आवेदन के समय 648 सीटें जारी की थीं। इसके बाद जब शिक्षकों को सीटें वितरित करने के लिए जो नियम लगाया गया, उस पर शिक्षकों की आपत्ति आनी शुरू हो गई। इसी समय लूटा होने के कारण यह काफी गर्मागर्म मुद्दा बन गया। कुछ शिक्षकों ने इसके लिए राजभवन तो कुछ ने शासन में शिकायत की। कुछ छात्र न्यायालय भी गए। इसके बाद नियमों को लेकर बहस छिड़ी तो एक-एक शब्द पर नियम लगाए जाने लगे। इसकी वजह से इंटरव्यू होने के बाद भी अब तक प्रवेश परिणाम नहीं जारी किया जा सका। हालांकि सूत्रों के अनुसार अभी भी सीट निर्धारण में कुछ कमियां रह गई हैं। जिन्हें दूर करने के बाद सीटों की संख्या में कुछ और रिफ्लेक्शन आएगा।
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छात्र व शिक्षक हित हमारी प्राथमिकता
पीएचडी की लगभग 525 सीटें तय हुई हैं। इन्हें सीट मैट्रिक्स बनाकर परिणाम जारी करने की कवायद की जा रही है। संभवत: बृहस्पतिवार को परिणाम जारी कर दिया जाएगा। हमारी प्राथमिकता छात्र और शिक्षक हित ही है। इसके अनुसार निर्णय लिया गया है।
प्रो. राजकुमार सिंह, प्रति कुलपति, लविवि

कोर्ट जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं
यह शिक्षकों के साथ धोखा है। विवि के कुछ अधिकारी वीसी को भी गुमराह कर विवाद बनाए रखना चाहते हैं। अब हमारे सामने न्यायालय जाने के अलावा कोई और विकल्प नहीं है।
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डॉ. नीरज जैन, अध्यक्ष, लूटा


 
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