रायबरेली। बेसिक शिक्षा विभाग ने अब परिषदीय विद्यालयों के छात्र-छात्राओं को हुनरमंद बनाने के लिए समर कैंप आयोजित करने की कवायद शुरू कर दी है। इसके जरिए गर्मी की छुट्टियां बच्चों के लिए मनोरंजक हो सकेंगी, क्योंकि इन समर कैंपों में बच्चों की रुचि को देखते हुए सिलाई-कढ़ाई, आर्ट-क्रॉफ्ट, गीत-संगीत का प्रशिक्षण दिया जाएगा। हर ब्लॉक के किसी एक विद्यालय में 10 दिन तक चलने वाले इस शिविर में आसपास के सभी स्कूलों के छात्र-छात्राओं को शामिल कराया जाएगा।
जिले के सभी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 20 मई से ग्रीष्मावकाश चल रहा है और पहली जुलाई से फिर स्कूल खुलेंगे। परिषदीय विद्यालयों के बच्चों का ठहराव स्कूलों में हो सके और शिक्षा के प्रति उनमें रुचि पैदा हो, इसके लिए विभाग हरसंभव प्रयास कर रहा है। गर्मी की छुट्टियों में भी बच्चे स्कूल से जुड़े रहें और उनके ग्रीष्मावकाश का सदुपयोग किया जा सके, इसके लिए समर कैंप की रूपरेखा बनाई गई है। प्रत्येक ब्लॉक में लगने वाले इन समर कैंपों में छात्र-छात्राओं को सिलाई-कढ़ाई, आर्ट एंड क्रॉफ्ट, मेंहदी, गीत-संगीत, नृत्य समेत कई कलाओं की बारीकियां सिखाई जाएंगी। सभी समर कैंप 10 दिन तक चलेंगी। इन कैंपों की शुरुआत इसी हफ्ते हो जाएगी। इस तरह शिविरों की रूपरेखा बनाई जा रही है, ताकि 30 जून तक समर कैंप चल सकें।
जहां ज्यादा बच्चे आ सकें, उसी स्कूल में लगेगा कैंप
समर कैंप आयोजित करने की जिम्मेदारी खंड शिक्षा अधिकारी मुख्यालय वीरेंद्र कुमार कनौजिया को सौंपी गई है। कनौजिया का कहना है कि हर ब्लॉक में समर कैंप लगाने के लिए उस विद्यालय का चयन किया जाएगा, जिसके आसपास कई विद्यालय संचालित हो रहे हैं। बच्चों की उपस्थिति पर भी ध्यान दिया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक बच्चे इन समर कैंपों में प्रतिभाग कर सकें। बालिकाओं को मीना मंच से जोड़ने में भी मदद मिलेगी।
समर कैंप लगाने का मकसद बच्चों में रुचि पैदा करने के साथ उन्हें हुनरमंद भी बनाना है, ताकि बच्चे किसी ने किसी कला में पारंगत हो सकें। ऐसा होने से भविष्य में होने वाली प्रतिस्पर्धाओं में परिषदीय स्कूलों के बच्चे अच्छा प्रदर्शन करेंगे। प्रशिक्षण के लिए अच्छे ट्रेनर की व्यवस्था की जाएगी।
- पीएन सिंह, बीएसए