जांच में सामने आया कि आरोपियों ने लोगों का आईडी प्रूफ व पैन आदि दस्तावेज जुटाए। फिर किसी जिले के एक मकान का पता आदि निकालकर उसका फर्जी रेंट एग्रीमेंट बनाया। इन सभी दस्तावेजों के जरिये आरोपियों ने फर्मों का रजिस्ट्रेशन कराया। पते के प्रमाण के रूप में लगाए गए बिजली बिल भी जांच में फर्जी पाए गए। पंजीयन में जिन मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल किया गया उनमें से ज्यादातर के सिम प्री एक्टिवेटेड यानी फेक आईडी पर थे। एसटीएफ ने इन सभी सबूतों को जुटाया है। बता दें, इस मामले में आगरा में भी रिपोर्ट दर्ज है।
ये फर्में एक ही खाते से लिंक मिलीं
जीपी ट्रेडर्स, हर्ष ट्रेडर्स, इंदर इंटरप्राइजेज, पाल इंटरप्राइजेज, आरके इंटरप्राइजेज, एएस इंटरप्राइजेज, राहुल इंटरप्राइजेज, मार्शल इंपैक्स इंटरप्राइजेज, एके ट्रेडर्स, कुमार ट्रेडर्स, नेलशन ट्रेडर्स, पटेल इंटरप्राइजेज, दत्ता इंटरप्राइजेज, केएस इंटरप्राइजेज, एके इंटरप्राइजेज और विक्रम ट्रेडर्स फर्म हैं। इन सभी फर्मों का लेनदेन यश बैंक की जनकपुरी शाखा दिल्ली से हुआ है
यह है पूरा मामला
एसटीएफ ने बीते 26 दिसंबर को मेरठ के गिरोह का खुलासा कर दिलशाद, रमेश पटेल, अंकुर तिवारी, स्वतंत्र कुमार, मो. वसीम, सोहेल, जावेद और इकरामुद्दीन को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। गिरोह बोगस फर्में बनाकर फर्जी बिल बनाकर जीएसटी चोरी करता था। अब तक की जांच में 500 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी की पुष्टि हो चुकी है।
जांच में 16 फर्में एक खाते से लिंक पाई गईं। जांच में कई अन्य फर्जीवाड़े सामने आ रहे हैं। गिरोह में कई और लोग भी शामिल हैं। इनमें से कई को चिह्नित किया जा चुका है। मामले की तफ्तीश चल रही है। जल्द ही और गिरफ्तारियां की जाएंगी। - प्रमेश शुक्ला, डीएसपी एसटीएफ