लखनऊ। अलग-अलग रूप में लिया जाने वाला नशा व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य पर बेहद बुरा असर डाल रहा है। किंग जाॅर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) में मानसिक रोग विभाग की ओपीडी में आने वाले मनोरोगियों में 50 फीसदी किसी न किसी नशे के लती होते हैं। यह जानकारी मानसिक रोग विभाग के प्रोफेसर डाॅ. आदर्श त्रिपाठी ने दी।
प्रो. आदर्श त्रिपाठी ने बताया कि किसी भी नशे का सीधा प्रभाव व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। केजीएमयू में आने वाले मानसिक रोगियों में तंबाकू का सेवन सबसे आम होता है। तंबाकू का मानसिक स्वास्थ्य पर बेहद खराब प्रभाव होता है। इसके साथ ही शराब, चरस-गांजा, अफीम और कोकीन तक के लती भी ओपीडी में आते हैं।
इनकी वजह से कई बीमारी पैदा होती है। कई बार इनका सेवन बीमारी को बेहद गंभीर भी बना देता है। मानसिक रोग विभाग की हर ओपीडी में औसतन 200 मरीज होते हैं। सीधे तौर पर पर कहा जा सकता है कि इनमें से 50 फीसदी मरीज किसी न किसी नशे के आदी होते हैं। इसलिए नशे की लत पर काबू रखकर मानसिक समस्याओं से भी बचा जा सकता है।
नशे की लत छुड़ाने के लिए विभाग में दो विशेष क्लीनिक
प्रो. आदर्श त्रिपाठी ने बताया कि नशे की लत छुड़ाने के लिए मानसिक रोग विभाग में रोजाना दो विशिष्ट क्लीनिक का संचालन होता है। इनमें से ड्रग सब्सटिट्यूशन थेरेपी (डीएसटी) क्लीनिक केंद्र सरकार के सहयोग से चलाई जाती है। यहां सभी प्रकार के नशे की लत छुड़ाने का प्रयास किया जाता है। इसी तरह नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (नैको) के सहयोग से इंजेक्टिंग ड्रग्स यूजर्स (आईडीयू) का संचालन किया जाता है। इस क्लीनिक पर नशीले इंजेक्शन लेने वाले व्यक्तियों का इलाज किया जाता है। इनमें से काफी नशे के लती एचआईवी संक्रमित भी निकलते हैं।
स्वास्थ्य पर बुरा असर
केजीएमयू में मेडिसिन विभाग के डाॅ. डी. हिमांशु ने बताया कि नशे की वजह से दिल, फेफड़े, किडनी समेत लगभग हर अंग को नुकसान पहुंचता है। शराब हमारे लिवर को खराब करती है। सिगरेट और तंबाकू फेफड़ों की समस्या के साथ ही कैंसर की बीमारी भी देती है। घबराहट के अलावा बीपी की समस्या भी होती है।