योगी सरकार आने के एक महीने के दौरान उत्तरप्रदेश में वो घटनाएं भी हुई है, जो भाजपा के बेहतर कानून व्यवस्था के दावे की पोल खोलती हैं।
एक महीने में सूबे में आगरा, फर्रुखाबाद और प्रतापगढ़ में तीन पुलिस कर्मियों की हत्या बड़ा सवाल है। सरकार के एक महीना पूरे होने से ठीक दो दिन पहले 17 अप्रैल को मैनपुरी के पुलिस थाने में महिला की पिटाई और फिर उसकी हत्या भी सरकार की साख के लिए सवाल बना है।
संभल में एक धार्मिक स्थल में पुलिस के जूते पहनकर प्रवेश और धार्मिक पुस्तक फाड़ने के बाद हुआ तनाव, रामपुर में गौकशी की खबर पर पहुंची पुलिस पर हमला, जौनपुर के खेतासराय में डीजे बजाने को लेकर दो पक्षों के बीच मारपीट के बाद दुकानों में आगजनी व तोड़फोड़, मुख्यमंत्री की हिदायत के बावजूद कई जगह पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ पुलिस की भिड़ंत भी बहुत कुछ कहती है।
योगी की इस हिदायत कि कोई हूटर का प्रयोग न करे और सत्ता की हनक न दिखाए के बावजूद मेरठ में एक भाजपा नेता के बेटे की कार से हूटर और काली फिल्म हटाने को लेकर पुलिस से हुई झड़प, गाजियाबाद में प्रदेश सरकार में मंत्री डॉ. रीता बहुगुणा जोशी के कथित रिश्तेदार और पुलिस के बीच झड़प, शाहजहांपुर में गाड़ी के कागज चेक करने पर भाजपा विधायक चेतराम के भतीजे और पुलिस इंस्पेक्टर के बीच कहासुनी, बरेली में विधायक चंद्रपाल सिंह के समर्थकों और पुलिस के बीच झड़प भी सरकार के सरोकारों पर सवाल उठाने वाली घटनाएं हैं।