एक तरफ आम आदमी पर बिजली की दरों का बोझ बढ़ाया जा रहा है तो दूसरी तरफ सरकारी विभागों से बिल की वसूली नहीं हो पा रही है। पांच बड़े सरकारी विभाग पावर कॉर्पोरेशन का 2052 करोड़ रुपये दबाए बैठे हैं।
जबकि सरकारी,गैर सरकार उपभोक्ताओं पर पूरे सूबे में बिजली बिल का कुल बकाया 23,890 करोड़ रुपये है। इसका खुलासा नियामक आयोग में पावर कॉर्पोरेशन की ओर से दाखिल किए बकाये की रिपोर्ट से हुआ है।
यह रिपोर्ट दरों के ऐलान से पहले दाखिल की गई थी लेकिन आयोग ने संज्ञान ही नहीं लिया।बिजली कंपनियों के घाटे की एक बड़ी वजह बकाया की वसूली न कर पाना है।
राजस्व वसूली न हो पाने का ठीकरा साल दर साल उपभोक्ताओं के सिर दरों में बढ़ोतरी के रूप में फोड़ा जा रहा है। नियामक आयोग ने नई बिजली दरों के निर्धारण की प्रक्रिया के दौरान ही पावर कॉर्पोरेशन से बकाये का विस्तृत ब्यौरा दाखिल करने को कहा था।