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यूपी में 49 बच्चों की मौत, डीएम सहित तीन अफसरों पर गिरी गाज

Tue, 05 Sep 2017 10:06 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
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सांकेत‌िक फोटो
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यूपी सरकार ने फर्रुखाबाद के राम मनोहर लोहिया संयुक्त चिकित्सालय में 49 बच्चों की मौत पर सख्त रुख अपनाते हुए डीएम रविन्द्र कुमार, सीएमओ डॉ. उमाकान्त पांडेय व सीएमएस डॉ. अखिलेश कुमार को पद से हटा दिया है। इस घटना की महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य के निर्देशन में डॉक्टरों की एक टेक्निकल टीम मौके पर भेजकर जांच कराई जा रही है।
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जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं, सीएमओ व सीएमएस पर दर्ज एफआईआर पर फिलहाल कोई कार्रवाई नहीं होगी। पहले तो इन बच्चों की मौत का कारण बीआरडी मेडिकल कॉलेज, गोरखपुर की तरह ऑक्सीजन की कमी को बताया गया, लेकिन अब सरकार इस बात से इन्कार कर रही है।

प्रमुख सचिव स्वास्थ्य प्रशांत त्रिवेदी ने यहां सोमवार को बताया कि टेक्निकल टीम घटना की तथ्यात्मक एवं तकनीकी छानबीन करेगी। इससे बच्चों की मृत्यु की वास्तविक स्थिति का पता चल सकेगा। त्रिवेदी ने बताया कि 20 जुलाई से 21 अगस्त 2017 के बीच इस अस्पताल में प्रसव के लिए 461 महिलाएं भर्ती की गईं। इन्होंने 468 बच्चों को जन्म दिया, जिसमें 19 स्टिलबॉर्न (पैदा होते ही मृत्यु हो जाना) थे।
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उन्होंने बताया कि बचे 449 बच्चों में से जन्म के समय 66 क्रिटिकल थे। इन्हें न्यू बॉर्न केयर यूनिट में भर्ती कराया गया। यहां छह की मृत्यु हो गई। जबकि 60 बच्चे पूरी तरह स्वस्थ्य हैं। इसके अलावा 145 बच्चे विभिन्न अस्पतालों से जिला महिला अस्पताल रेफर किए गए थे। इनमें से 24 की मृत्यु हो गई, जबकि 121 इलाज से स्वस्थ हो गए। इस प्रकार कुल 49 बच्चों की मौत हुई।
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ऑक्सीजन की कमी से इन्कार

प्रतीकात्मक फोटो - फोटो : अमर उजाला
प्रमुख सचिव ने कहा कि मजिस्ट्रेटी जांच में ऑक्सीजन की कमी की जो बात कही गई है वह प्रथम दृष्टया पूरी तरह गलत है। अस्पताल में पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन थी। मामले को सेंसेशनल बनाने के लिए ऐसा कहा गया। अस्पताल में ऑक्सीजन सिस्टम पूरी तरह सही चल रहा है। बच्चों की मृत्यु का ऑक्सीजन की कमी से कोई लेना-देना नहीं है।

मामले में नगर मजिस्ट्रेट फर्रुखाबाद ने जो रिपोर्ट दी है उसमें उन्होंने लिखा है कि मरीजों के परिवारीजनों से फोन पर वार्ता से पता चला है कि अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी थी। पर्याप्त ऑक्सीजन न मिलने के कारण बच्चों की मृत्यु हुई। प्रमुख सचिव ने यह भी कहा कि फोन पर मजिस्ट्रेटी जांच नहीं होती है। उन्होंने कहा कि मौत का कारण पैरीनेटल एस्फिक्सिया हो सकता है। इसमें मुख्य रूप से प्लेसेंटल ब्लड फ्लो की रुकावट भी हो सकती है। सही कारण तकनीकी जांच के माध्यम से ही स्पष्ट हो सकता है।

संवादहीनता के कारण तीनों को हटाया
प्रमुख सचिव सूचना अवनीश कुमार अवस्थी व प्रमुख सचिव स्वास्थ्य प्रशांत त्रिवेदी ने कहा कि संवादहीनता के कारण ही डीएम, सीएमओ व सीएमओ को हटाया गया है। सरकार की यह मंशा होती है कि सारे अफसर जिले में समन्वय बनाकर काम करें लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं हुआ। इसलिए संदेश देने के लिए तीनों को हटाया गया है। फिलहाल इस मामले में दर्ज एफआईआर पर कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।
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