मायावती शासनकाल के 45 कर्मियों की भ्रष्टाचार व आय से अधिक संपत्ति की जांच सतर्कता अधिष्ठान ने शुरू कर दी है। यह जांच लोकायुक्त की रिपोर्ट के आधार पर शुरू की गई है। सतर्कता अधिष्ठान के सूत्रों ने बताया कि लोकायुक्त ने अपनी रिपोर्ट राज्यपाल के माध्यम से शासन को भेजी थी।
रिपोर्ट में खनन विभाग के उन 45 कर्मियों का कच्चा चिट्ठा है, जिन्होंने स्मारकों के निर्माण में नियमों को दरकिनार करते हुए अपने पद का दुरुपयोग किया और राज्य सरकार को राजस्व की हानि पहुंचाई। इनमें विभाग के लिपिक, वरिष्ठ लिपिक और निरीक्षक स्तर के कर्मी शामिल हैं।
घोटाले की भी जांच
सतर्कता अधिष्ठान मायावती के वर्ष 2007 से 2012 के शासनकाल के दौरान बने करोड़ों के स्मारकों में घोटालों की भी जांच कर रहा है। उस दौरान लगभग 2600 करोड़ रुपये की लागत से स्मारक, पार्क और मूर्तियां बनवाई गई थीं। इन पार्कों में डॉ. भीमराव आंबेडकर, कांशीराम और मायावती की मूर्तियां लगी हैं।
आरोप है कि इस स्मारक के निर्माण में बरती गई अनियमितता से सरकारी खजाने को 111 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ। बाद में मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत प्रवर्तन निदेशालय ने भी इस मामले में जांच शुरू की और कई स्थानों पर छापेमारी की थी।