20 साल तक बिना वेतन के ही स्कूलों की चौखट पर गुहार के साथ ही लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार 42 शिक्षकों को उनका हक मिल गया है। हाईकोर्ट ने इन्हें फिर से तैनाती का आदेश दिया है।
जिन चेहरों पर झुर्रियों का असर दिखने लगा था, फिर से नौकरी का आदेश मिलने पर वे खिल उठे हैं। बीएसए मनिराम सिंह ने कहा कि खंड शिक्षा अधिकारियों को आदेश जारी कर दिया गया है। वेतन दिए जाने की कार्रवाई की जा रही है। उपस्थिति की पुष्टि के बाद ही शिक्षकों को वेतन दिया जा सकता है।
वर्ष 1999 में 20 अप्रैल को जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के आदेश पर गोंडा के 51 बीएड डिग्री धारकों को प्राइमरी स्कूलों में नियुक्ति मिली। इन लोगों ने स्कूल में कार्यभार ग्रहण किया, लेकिन कुछ दिन बाद ही वहां सेवारत शिक्षकों ने साथ में हस्ताक्षर कराने से मना कर दिया।
तब इन शिक्षकों ने अलग रजिस्टर बना लिया और हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर बताया कि महज मौखिक आदेश पर इन्हें हस्ताक्षर नहीं करने दिया जा रहा। दरअसल, 1997-98 में सहायक अध्यापकों की कमी को देखते हुए सरकार ने बीएसए को आदेश दिया कि वे बीएड डिग्रीधारियों को सहायक अध्यापक पद पर नियुक्ति दें।
करीब 7300 लोगों को नौकरी दी गई। इस बीच, 1999 में तत्कालीन प्रमुख सचिव, बेसिक शिक्षा ने बीएसए को मौखिक आदेश देकर इन्हें हस्ताक्षर नहीं करने दिया। तब मामला हाईकोर्ट में शुरू हुआ। वर्ष 2008 में याचिका दाखिल तो हुई, लेकिन वेतन न मिलने से आर्थिक समस्या से जूझ रहे लोग पैरवी नहीं कर सके।
बीते 21 नवंबर 2019 को हाईकोर्ट ने बीएसए को पूर्व में नियुक्त शिक्षकों को वेतन देने का आदेश दिया है। 51 बीएड डिग्रीधारियों में से तीन की मौत हो चुकी है। 4 की उम्र रिटायरमेंट से अधिक हो चुकी है।