प्रदेश में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी दूर करने के लिए कॉलेज ऑफ फिजीशियन एंड सर्जन (सीपीएस) डिप्लोमा पाठ्यक्रम शुरू होगा। पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया (पीएचएफआई) के साथ चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग ने इसके लिए समझौता पत्र पर हस्ताक्षर किया है। अब आगे की रूपरेखा तैयार की जा रही है। यूपी में बाल रोग, नेत्र, स्त्री एवं प्रसूति रोग, पैथोलॉजी में डिप्लोमा पाठ्यक्रम से इसकी शुरुआत होगी। ये पाठ्यक्रम जिला अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी को पूरा करने में मददगार होंगे। खास बात यह कि पीएमएस संवर्ग के चिकित्सक ही अपने डॉक्टरों को पढ़ाएंगे।
कॉलेज ऑफ फिजीशियन एंड सर्जन का यह कोर्स दो साल का है। उड़ीसा, राजस्थान, महाराष्ट्र, दादर नागर हवेली में ये कोर्स चल रहे हैं। जिन पाठ्यक्रमों को शुरू किया जा रहा है वे सभी मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया से मान्यता प्राप्त हैं। इसके लिए पीएमएस चिकित्सक ही आवेदन कर सकेंगे और वे ही इसमें शिक्षक होंगे। शिक्षक के लिए एमडी या एमएस की डिग्री के साथ 5 से 10 साल का अनुभव जरूरी होगा। सीटों का आवंटन बेड की क्षमता के आधार पर किया जाएगा। 30 बेड पर दो छात्रों का आवंटन होगा। यदि जिला अस्पताल 600 बेड का है तो वहां 20 चिकित्सकों को प्रवेश दिया जाएगा। इस तरह प्रदेश के 175 जिला व संयुक्त अस्पतालों में बड़ी संख्या में विशेषज्ञ डॉक्टर तैयार होंगे।
पीएमएस संघ के महामंत्री डॉ. अमित सिंह ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार प्रांतीय चिकित्सा सेवा संवर्ग (पीएमएस) में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी है। संवर्ग में कुल 18,700 पद हैं। लगभग 11 हजार चिकित्सक कायर्रत हैं। इनमें से 3500 ही विशेषज्ञ चिकित्सक हैं। जबकि एमबीबीएस डिग्री वाले आठ हजार चिकित्सक हैं। एमबीबीएस चिकित्सकों को इस कोर्स को चुनने का मौका मिलेगा। नए डॉक्टर भी प्रांतीय चिकित्सा सेवा की ओर आकर्षित होंगे। उन्होंने बताया कि पाठ्यक्रम से संबंधित जानकारी के लिए वह एक टीम के साथ मुम्बई गए थे। अब इसकी रिपोर्ट शासन को सौंपी जाएगी।