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जालसाजी कर दूसरे के नाम कर दी जमीन

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गोंडा। जिले के चकबंदी विभाग में जालसाजी कर बैनामे की जमीन दूसरे के नाम करने के 56 वर्ष के पुराने मामले में चकबंदी विभाग के तीन अफसर फंस गए हैं। राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव के आदेश पर चकबंदी आयुक्त की जांच में चकबंदी अधिकारी, सहायक चकबंदी अधिकारी व चकबंदीकर्ता दोषी पाए गए हैं। चकबंदी आयुक्त ने तीनों अफसरों के खिलाफ आरोप पत्र जारी कर विभागीय कार्रवाई का निर्देश दिया है।
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परसपुर थाना क्षेत्र के अंदूपुर गांव के मजरा पूरे पांडेय के रहने वाले कृष्णानंद पांडेय व कलावती के मुताबिक करीब वर्ष 1961 में उन्होंने अपने गांव के रहने वाले ह्रदयराम व उनके दो भाइयों से 30 बीघा जमीन का बैनामा कराया था। कृष्णानंद का कहना है कि वर्ष 2017 में गांव में चकबंदी प्रक्रिया शुरु हुई तो गांव के रहने वाले भगौती प्रसाद ने उसकी जमीन को हड़पने की नीयत से रामप्रगट व उसके भाइयों के बीच वर्ष 1961 का एक फर्जी समझौता आदेश तैयार कराया और अभिलेखागार के बंदोबस्त रजिस्टर में अपना नाम दर्ज करा लिया। इसके बाद चकबंदी विभाग में ह्रदयराम व उसके दोनो भाइयों को प्रतिवादी बनाकर मुकदमा दायर कर दिया। इस कूटरचित आदेश का परीक्षण किए बिना ही तत्कालीन चकबंदी अधिकारी प्रदीप कुमार श्रीवास्तव ने भगौती प्रसाद के पक्ष में आदेश कर दिया। जब उसने शिकायत की तो सीओ ने आदेश पर रोक लगाते हुए सुनवाई की नई तारीख निर्धारित कर दी। लेकिन इसी बीच सीओ ने फिर से भगौतीप्रसाद के पक्ष में आदेश कर दिया। परेशान कृष्णानंद ने 15 मार्च को इस मामले की शिकायत प्रमुख सचिव राजस्व से की थी। प्रमुख सचिव के आदेश पर चकबंदी आयुक्त हरेंद्रवीर सिंह ने अपर संचालक चकबंदी सुरेश सिंह यादव से प्रकरण की जांच कराई तो इस खेल का खुलासा हुआ। अपर संचालक चकबंदी सुरेश सिंह यादव की जांच रिपोर्ट में चकबंदी अधिकारी प्रदीप कुमार श्रीवास्तव, सहायक चकबंदी अधिकारी रामनेवाज वर्मा व चकबंदीकर्ता मो. असलम दोषी पाए गए। इस रिपोर्ट को गंभीरता से लेते हुए चकबंदी आयुक्त ने तीनों अफसरों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर विभागीय कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
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