तेज नरायन पांडेय समेत दो के खिलाफ केस दर्ज करने का आदेश
फैजाबाद। वन विभाग में नौकरी लगवाने के लिए 10 लाख रुपए घूस लेने के मामले में सपा के पूर्व वन राज्य मंत्री तेज नरायन पांडेय उर्फ पवन और गन्ना समिति के पूर्व सभापति सुरेंद्र यादव के खिलाफ अदालत ने परिवाद दर्ज करने का आदेश दिया है।
यह आदेश आलोक सिंह की अर्जी पर एसीजेएम पारुल अत्री की कोर्ट से हुआ है। मामले में परिवादी के बयान के लिए कोर्ट ने 18 अगस्त की तिथि नियत की है।
कोर्ट में दी गई अर्जी में साकेत पीजी कॉलेज के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष आलोक सिंह निवासी मानापुर थाना पूराकलंदर ने आरोप लगाया कि पूर्व मंत्री तेज नरायन पांडेय ने वन राज्य मंत्री रहते नौकरी लगवाने के लिए उससे 10 लाख रुपए लिए थे।
यह रुपए सुजीत विक्रम व विनीत सिंह के सामने उन्होंने लिए लेकिन न तो नौकरी लगवाई और न ही रुपए वापस किए। इसी बीच बीती 2 जून को सहकारी गन्ना विकास समिति के सभापति सुरेंद्र यादव के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आना था।
आलोक का आरोप है कि वह अपने मित्र दीपेंद्र को सभापति बनाने के पक्ष में था। इसकी जानकारी होने पर मंत्री ने सुरेंद्र का समर्थन करने का दबाव बनाया। एक जून को किसी मिश्रा नाम के व्यक्ति ने उसको पूर्व मंत्री पवन व सभापति सुरेंद्र यादव से बात करने के लिए फोन किया।
रात 11 बजे उसने सुरेंद्र यादव के मोबाइल पर फोन किया तो दीपेंद्र के दो डायरेक्टरों को तोड़ने के लिए कहा गया। आलोक का आरोप है कि उसने इंकार किया और तेज नरायन को फोन पर पूरी बात बताई तो वह बुरी तरह उत्तेजित हो गए।
मुझे गालियां देते हुए कहने लगे कि बहुत बड़े नेता न बनो, तुमसे जो कहा जा रहा है वही करो अन्यथा नौकरी लगवाने के लिए लिया हुआ रुपया वापस नहीं करूंगा।
अगर कहीं शिकायत करोगे तो जान से मरवाकर लाश गायब करवा दूंगा। इसकी शिकायत थाने और एसएसपी से की लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई तो उसने कोर्ट में अर्जी दायर की।
मामले में पूर्व मंत्री पवन पांडेय का कहना है कि कोर्ट मामले को देख रही है। इसमें वह कोई प्रतिक्रिया नहीं दे सकते। फर्जी आरोपों का कोर्ट में सामना करेंगे।