हजारों करोड़ के पान मसाला बाजार में कर चोरी के आरोप तो हैं ही, इसमें नकली मसाले की खपत के अलावा माफिया भी प्रवेश कर चुके हैं। जीएसटी खुफिया विंग की पड़ताल में खुलासा हुआ है कि पान मसाला बाजार में 40 फीसदी नकली मसाला है व माफिया का भी कब्जा है। नकली और लोकल मसाले का ये बाजार असली के समानांतर खड़ा हो चुका है। ठेले-गुमटी से लेकर पान की दुकानों में ये नकली तंबाकू-पान मसाला बेधड़क बिक रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक 17 हजार करोड़ का नकली मसाला और तंबाकू बाजार में खपाया जा रहा है।
जांच विंग के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक नकली पान मसाले के खेल में कुछ असली मसाला बनाने वाले भी शामिल हैं। गुपचुप चल रही पान मसाला मशीनों में आधी असली वालों की ही हैं। अकेले यूपी, दिल्ली और एनसीआर में 150 से ज्यादा पान मसाला मशीनें चोरी छिपे चलाई जा रही हैं। गलियों और दूरदराज के इलाके के एक कमरे में चलने वाली इन मशीनों से करोड़ों की टैक्स चोरी करने के ये शातिर मास्टरमाइंड खुद ही नकली का हल्ला मचाकर कई बार छापा डलवा देते हैं। पिछले दो साल में नकली के नाम पर मारे गए छापों में महज आठ करोड़ का ही माल सीज किया गया।
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नकली वाले दे रहे असली के मुकाबले 25 फीसदी कमीशन
अधिकारी के मुताबिक दूसरी तरफ माफिया ने सिंडीकेट बनाकर समानांतर नकली फैक्टरी खोल ली है। नकली माल बेचने वाले छोटे दुकानदारों को असली के मुकाबले 25 फीसदी ज्यादा कमीशन दिया जा रहा है। विंग ने अपनी पड़ताल में कहा है कि पान मसाला बनाने के लिए तकनीकी या विज्ञान की जरूरत नहीं है।
महज 200 वर्गफुट के एक कमरे, एक लाख रुपए और चार कर्मचारियों के साथ मसाला की फैक्टरी तैयार हो जाती है। कानपुर और दिल्ली में पान मसाले और तंबाकू के कच्चे माल के 32 सप्लायर हैं, जो फार्मूले सहित कच्चा माल सप्लाई करते हैं। इसको लेकर सात बड़े पान मसाला निर्माता केंद्रीय और राज्य कर के शीर्ष अफसरों से शिकायत भी कर चुके हैं।