चालू वित्तीय वर्ष में मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना के तहत 90 करोड़ रुपये का निवेश करते हुए 1800 इकाइयों की स्थापना की जाएगी। इससे 36000 लोगों को रोजगार के अवसर मुहैया हो सकेंगे।
मुख्य कार्यपालक अधिकारी मनमोहन चौधरी ने रविवार को यहां चारबाग के बाल संग्रहालय लॉन में चल रही खादी प्रदर्शनी के समापन अवसर पर यह बात कही।
इस अवसर पर खादी एवं ग्रामोद्योग मंत्री ब्रह्माशंकर त्रिपाठी ने प्रेसवार्ता में कहा कि तमाम बेरोजगार लोग खादी वस्त्र बनाकर जीवन यापन कर रहे हैं। मौजूदा समय में इन्हें 70 से 80 रुपये प्रतिदिन मिलता है। इसे बढ़ाकर 250 से 300 रुपये करने के प्रयास किए जाएंगे, जिससे खादी के प्रति इनका रुझान बना रहे।
खादी वस्त्रों के प्रचार-प्रसार के लिए सूबे के 9 जिलों में प्रदर्शनी लगाई जाएगी। जहां खादी-ग्रामोद्योग केंद्र नहीं हैं, वहां बनाए जाएंगे। ग्रामोद्योग क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले उद्यमियों को पुरस्कृत करने की योजना लागू की गई है। इसके लिए 5.50 लाख रुपये आवंटित किए जा चुके हैं। अगले साल से इसे 10 लाख करने का प्रस्ताव है।
लागत घटेगी और कीमत भी कम होगी
मंत्री ने कहा कि वर्तमान कॉप्टीशन के दौर में खादी में भी आधुनिकता का समावेश जरूरी है। इसे बढ़ावा देने के लिए खादी वस्त्रों की छपाई मशीनों से कराने की जरूरत है। इससे लागत घटेगी और खादी वस्त्रों की कीमत में भी कमी आएगी। इसके लिए मुख्यमंत्री से बात करके बोर्ड बैठक में प्रस्ताव रखा जाएगा।
मंत्री ने खादी प्रदर्शनी से की खरीदारी
खादी ग्रामोद्योग मंत्री ने प्रदर्शनी में स्टॉलों पर बिक रहे उत्पादों के बारे में जानकारी ली। उन्होंने इटावा के स्टॉल से जोड़ों के दर्द का तेल, आंध्र प्रदेश के स्टॉल से लेडीज सूट, सहारनपुर के स्टॉल से अगरबत्ती और राजस्थान के स्टॉल से पाचक मेथी व चादर खरीदी।
सर्वाधिक बिक्री करने वाले पुरस्कृत
खादी प्रदर्शनी में इस बार तीन करोड़ रुपये की बिक्री हुई, जो पिछले साल के मुकाबले 50 लाख रुपये अधिक है। प्रदर्शनी के समापन पर मंत्री ने सर्वाधिक बिक्री करने वाली खादी इकाइयों में स्वराज्य आश्रम कानपुर को प्रथम, ग्राम सेवा संस्थान फतेहपुर को द्वितीय और प्रीति खादी ग्रामोद्योग समिति मैनपुरी को तृतीय पुरस्कार प्रदान किया।
ग्रामोद्योग इकाइयों में माया ग्रामोद्योग प्रतापगढ़ को प्रथम, उमिदा मुजफ्फरनगर को द्वितीय तथा पुष्पांजलि ग्रामोद्योग सेवा संस्थान प्रतापगढ़ को तृतीय पुरस्कार दिया गया।