प्रदेश के 300 एमबीबीएस छात्रों के पंजीयन में आ रही समस्या और मान्यता में कहां चूक हुई, इसकी पड़ताल कराई जा रही है। किसकी गलती से मान्यता फंसी रही, इस पर भी शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी। यह जानकारी देते हुए चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण महानिदेशक (डीजीएमई), किंजल सिंह ने बताया कि विधिक राय लेते हुए जल्द से जल्द छात्रों की समस्या का समाधान कराने का प्रयास किया जा रहा है।
मालूम हो कि राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) की टीम मेडिकल कॉलेजों का हर साल निरीक्षण करती है। शिक्षकों की संख्या, लैब व अन्य संसाधन के आधार पर संबंधित कॉलेज को मान्यता देती है। संसाधन कम होने पर सीटें कम कर दी जाती हैं। आजमगढ़, सहारनपुर और बांदा के मेडिकल कॉलेजों को 100-100 छात्रों के दाखिले की सशर्त मान्यता दी गई थी। 2019 में कोविड आ गया। ऐसे में इन कॉलेजों की सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये हुई। स्थलीय परीक्षण नहीं हुआ। महानिदेशालय ने भी इस संबंध में सक्रियता नहीं दिखाई, जिसका नतीजा था कि 2017 व 2018 का मामला लंबित रहा। अब 2017 बैच के छात्र परीक्षा पास कर पंजीयन के लिए निकले तो समस्या पता चली।
- राजकीय मेडिकल कॉलेज एंड सुपर स्पेशियलिटी, आजमगढ़ के प्रधानाचार्य डॉ. आरपी शर्मा का कहना है कि कुछ समस्या आई है। मामले में डीजीएमई को पत्र लिखा गया है। शासन से भी बात चल रही है। कोशिश है कि जल्द से जल्द छात्रों को राहत दी जाए।
- रानी दुर्गावती राजकीय मेडिकल कॉलेज, बांदा की प्रधानाचार्य डॉ. सुनील कुमार का कहना है कि मैंने अभी कुछ दिन पहले कार्यभार ग्रहण किया है। यह मामला 2017 का है। उस वक्त भौतिक सत्यापन नहीं होने की वजह से मान्यता फंस गई है। समस्या का समाधान कराया जा रहा है।
- शेख उलहिंद मौलाना महमूद हसन मेडिकल कॉलेज, सहारनपुर के प्रधानाचार्य डॉ. संगीता अनेजा का कहना है कि यह मामला मेरे कार्यभार ग्रहण करने से पहले का है फिर भी महानिदेशालय को अवगत कराया गया है।