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लविवि में परीक्षा के खाते से दिये गये 12 करोड़ रूपये का नहीं मिला हिसाब

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3 करोड़ का हिसाब न देने पर 30 और शिक्षकों को नोटिस
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लविवि के परीक्षा विभाग से कुल 12 करोड़ एडवांस लेने के बाद नहीं दिया गया हिसाब
लखनऊ विश्वविद्यालय के बैंक खाते से जालसाजी कर 1.09 करोड़ रुपये निकालने का मामला अभी गर्म है। इस बीच लविवि के परीक्षा विभाग से एडवांस पैसे लेकर उसका हिसाब न देने वाले शिक्षकों को नोटिस जारी करने का सिलसिला शुक्रवार को भी जारी रहा। इस बार 30 शिक्षकों को तीन करोड़ रुपये के एडवांस का हिसाब न देने पर नोटिस जारी किया गया है। सिर्फ परीक्षा विभाग के बैंक खाते से ही एडवांस दिए गए 12 करोड़ रुपये का हिसाब अभी तक नहीं मिला है।
एडवांस के खर्च का ब्योरा या नोटिस का जवाब न देने पर शिक्षकों के वेतन से यह धनराशि काटी जाएगी। दो दिन पहले 40 शिक्षकों को पांच करोड़ रुपये एडवांस का हिसाब न देने की वजह से नोटिस जारी हुआ था। लविवि में लेखा के रख-रखाव पर लगातार सवाल उठाए जाते रहे हैं। स्थानीय निधि लेखा परीक्षा विभाग अपने ऑडिट में हर बार गंभीर आपत्तियां उठाता रहा है। इसके बावजूद लविवि प्रशासन ने इन आपत्तियों पर विशेष ध्यान नहीं दिया। विवि के बैंक खाते से जालसाजी कर 1.09 करोड़ रुपये निकाले जाने के बाद लेखा विभाग इन आपत्तियों पर पहली बार गंभीर हुआ है। विभाग ने स्थानीय निधि लेखा परीक्षा विभाग द्वारा उठाई गई आपत्तियों पर एक के बाद एक नोटिस जारी करना शुरू कर दिया है।
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समाज कार्य के पूर्व विभागाध्यक्ष को नोटिस
लविवि के वर्तमान प्रति-कुलपति प्रो. राजकुमार सिंह को भी 90 हजार रुपये का हिसाब न देने के लिए नोटिस जारी किया गया है। यह नोटिस उस अवधि का है जब वे समाज कार्य के विभागाध्यक्ष हुआ करते थे। प्रो. राजकुमार सिंह ने बताया कि उनके साथी शिक्षक ने सेमिनार के आयोजन के दौरान यह एडवांस लिया था। विभागाध्यक्ष होने के नाते उनके नाम से यह चढ़ा हुआ है। उनके अनुसार शिक्षक से सेमिनार के खर्च की पूरी फाइल देने और उसका हिसाब साफ करने के लिए कहा गया है।
तीन शिक्षकों ने लेखा विभाग को दिखाए दस्तावेज
लविवि द्वारा पांच करोड़ रुपये एडवांस का हिसाब न देने की वजह से जारी हुए नोटिस के बाद तीन शिक्षकों ने लेखा विभाग को पुराने दस्तावेज दिए हैं। शिक्षकों के अनुसार उनका हिसाब पहले ही साफ हो चुका है और उन्हें गलती से नोटिस दिया गया है। इन तीन शिक्षकों में प्रो. एनके पांडेय को एक लाख रुपये, प्रो. रानू उनियाल को 50 हजार रुपये और डॉ. रतन कुमार को 20 हजार रुपये का हिसाब देने के लिए नोटिस जारी किया गया था।
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लेखा विभाग को आपत्तियों का निस्तारण करना चाहिए
लेखा विभाग को ऑडिट आपत्तियों का निस्तारण करना चाहिए। उसी के तहत ये नोटिस जारी किए गए हैं। जिन शिक्षकों ने अपना हिसाब दे दिया होगा उन्हें लेखा विभाग से एनओसी ले लेनी चाहिए।
- प्रो. एसपी सिंह,
कुलपति, लविवि
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