ग्राम पंचायतों में प्रशासकों की नियुक्ति की वैधता को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में अब तीन मार्च को सुनवाई होगी। न्यायमूर्ति ऋतुराज अवस्थी और न्यायमूर्ति मनीष माथुर की खंडपीठ ने पक्षकारों के वकीलों की सहमति से यह तिथि नियत की है। राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राघवेंद्र सिंह पेश हुए।
पंचायत राज ग्राम प्रधान संगठन की जनहित याचिका में प्रदेश की ग्राम पंचायतों में प्रधानों का कार्यकाल खत्म होने के बाद इनमें प्रशासकों की नियुक्ति किए जाने को संवैधानिक प्रावधान का उल्लंघन बताया गया है। याची के अधिवक्ता सीबी पांडेय के मुताबिक वर्ष 2000 में एक अध्यादेश के बाद राज्य सरकार ने यूपी पंचायत राज अधिनियम बनाया था। इसकी धारा 12(3) (ए) के तहत कार्यकाल खत्म होने पर सरकार पंचायतों में प्रशासन समिति या प्रशासक नियुक्त कर सकती है। जबकि इस अध्यादेश को हाईकोर्ट की खंडपीठ ने असंवैधानिक करार देकर रद्द कर दिया था। ऐसे में जब मूल अध्यादेश के निरस्त होने पर उसके बाद बने कानून के तहत राज्य सरकार प्रशासकों की नियुक्ति नहीं कर सकती है। याचिका में यह कहते हुए अधिनियम की धारा 12(3) (ए) को चुनौती दी गई है। क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 243 (ई) के तहत पंचायतों का कार्यकाल 5 साल से आगे नहीं बढ़ाया जा सकता है।