चौकीदार के पीछे ही सात लोग भीतर घुस आए जिसमें से दो ने पुलिस की वर्दी पहन रखी थी। सभी ने असलहे निकालकर तान दिए और गोली मारने की धमकी दी। इस बीच पुलिसकर्मियों ने बेड से बिस्तर हटाकर फेंक दिया और बॉक्स खोलकर उसके भीतर रखे रुपये झोलों में भरने लगे। अंकित और उसके साथियों ने रोकने की कोशिश की तो लात-घूसों से जमकर पीटा। झोलों में रुपये भरने के बाद पुलिसकर्मी और उनके साथियों ने अंकित व उसके सहयोगियों को पकड़ लिया। बाकी बचे 1.53 करोड़ रुपये के साथ सभी को गोसाईंगंज थाना ले जाया गया। यहां पकड़े गए लोगों और ब्लैकमनी पर कार्रवाई को लेकर पंचायत चलती रही।
सूचना पाकर क्षेत्राधिकारी मोहनलालगंज राजकुमार शुक्ला भी आ गए
इस बीच, लुटेरे पुलिसकर्मियों ने सोशल मीडिया पर फ्लैट से ब्लैकमनी समेत कारोबारियों के पकड़े जाने का मैसेज वायरल कर वाहवाही लूटने की कोशिश की लेकिन उनका झूठ ज्यादा देर टिक न सका। एसएसपी कलानिधि नैथानी ने मामले की जांच के लिए क्राइम ब्रांच की टीम भेजी तो पुलिसकर्मियों की साजिश का खुलासा हो गया। एसएसपी ने बताया कि भ्रष्टाचारी और लुटेरे पुलिसकर्मियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। गिरफ्तार दरोगा आशीष तिवारी और पवन मिश्रा कर उनसे पूछताछ की जा रही है।
एसएसपी लखनऊ कलानिधि नैथानी ने दोनों भ्रष्टाचारी अफसरों पर कड़ी कार्रवाई के तहत मुकदमा पंजीकृत कर लिया गया। एसएसपी ने बताया कि शक होने पर तत्काल आईपीएस विक्रांत को भेजा गया। उन्होंने जांच की जिसमें हकीकत सामने आई। बरामदगी की रकम लेकर फरार मुखबिर मधुकर मिश्रा की धरपकड़ जारी है। क्राइम ब्रांच ने पुलिसकर्मियों के आवास से 36 लाख रुपये बरामद किये है।