लखनऊ। एसजीपीजीआई में इलाज और शोध के आंकड़े गिनाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके वास्तविक परिणाम भी सामने आने चाहिए। मंगलवार को संस्थान के 30वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने संस्थान को उपलब्धियों के साथ उनकी गुणवत्ता और प्रभाव का भी आकलन करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि संस्थान ने 300 बच्चों की सफल हार्ट सर्जरी की है, लेकिन यह भी बताया जाना चाहिए कि इनमें से कितने बच्चे लंबे समय तक स्वस्थ और सामान्य जीवन जी रहे हैं। उपचार और शोध के परिणामों का नियमित मूल्यांकन होना चाहिए।
राज्यपाल ने कहा कि केंद्र सरकार ने कैंसर की 70 दवाओं पर सीमा शुल्क समाप्त कर दिया है। अब अस्पतालों को यह भी बताना चाहिए कि इन दवाओं का लाभ वास्तव में कितने मरीजों तक पहुंच रहा है। उन्होंने बताया कि पीजीआई ने भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) को 100 शोध परियोजनाएं भेजी हैं, जिनकी समीक्षा सितंबर-अक्तूबर में होगी। उन्होंने आयुष्मान भारत योजना को अधिक समावेशी बनाने की जरूरत बताते हुए कहा कि कई दो सदस्यीय परिवार अभी भी योजना के लाभ से वंचित हैं, जबकि बड़े परिवारों के सभी सदस्यों के कार्ड बन चुके हैं। उन्होंने बताया कि कई जिलों में उन्होंने जिलाधिकारियों से कहकर ऐसे परिवारों के आयुष्मान कार्ड बनवाए हैं।
नेफ्रोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. नारायण प्रसाद को मिला पहला गवर्नर्स गोल्ड मेडल
दीक्षांत समारोह में पहली बार संस्थान के सर्वश्रेष्ठ शिक्षक के रूप में नेफ्रोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. नारायण प्रसाद को गवर्नर्स गोल्ड मेडल फॉर बेस्ट टीचर से सम्मानित किया गया। संस्थान के 279 विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की गई। वहीं उपचार एवं अनुसंधान में उत्कृष्ट योगदान देने वाले 13 संकाय सदस्यों और रेजिडेंट डॉक्टरों को प्रोफेसर एस.एस. अग्रवाल, प्रोफेसर एस.आर. नाइक, प्रोफेसर आर.के. शर्मा और डॉ. सब्यसाची सरकार पुरस्कार के साथ सर्वाधिक पेटेंट तथा इंट्रामुरल और एक्स्ट्रामुरल अनुदान प्राप्त करने पर सम्मानित किया गया। राज्यपाल ने एंडोक्राइन सर्जरी विभाग के डॉ. सबरतनम, विभागाध्यक्ष डॉ. गौरव अग्रवाल और चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजेश हर्षवर्धन द्वारा लिखित पुस्तक का विमोचन भी किया। समारोह में जीवन में मां के महत्व पर आधारित प्रेरक प्रस्तुति, गुजराती लोकनृत्य और पीजीआई की ओर से गोद लिए गए गांवों के स्कूली बच्चों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आकर्षण का केंद्र रहीं।
बुनियादी सुविधाओं की कमी पर भी जताई नाराजगी जनभवन के सर्वे का हवाला देते हुए राज्यपाल ने इमरजेंसी मेडिसिन एवं रीनल ट्रांसप्लांट सेंटर में पानी टपकने, कई छात्रावासों में मेस, वाई-फाई और वॉशिंग मशीन जैसी मूलभूत सुविधाओं के अभाव तथा पुस्तकालय के 65 कंप्यूटरों की धीमी इंटरनेट गति पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि छात्रावासों में बाहर से भोजन मंगाने की प्रथा बंद होनी चाहिए, क्योंकि इसके जरिए नशीले पदार्थ भी परिसर तक पहुंच सकते हैं। उन्होंने पीजीआई से अगले एक वर्ष में देश का नंबर-वन चिकित्सा संस्थान बनने का लक्ष्य निर्धारित करने का आह्वान किया।
पर्चे पर नो बेड लिखकर मरीज को न लौटाएं समारोह में डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा कि किसी भी मरीज को केवल ''नो बेड'' लिखकर नहीं लौटाना चाहिए। यदि बेड उपलब्ध न हो तो पहले प्राथमिक उपचार दिया जाए और उसके बाद ही दूसरे अस्पताल के लिए रेफर किया जाए। उन्होंने डिग्री और पुरस्कार प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि चिकित्सा पेशे में रोगी सेवा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और हर मरीज के साथ करुणा, गरिमा और समर्पण का व्यवहार किया जाना चाहिए।
राज्यपाल ने बीच में राष्ट्रगीत रुकवाया
दीक्षांत समारोह के आरंभ में शोभा यात्रा निकलने के दौरान ही राष्ट्रगीत शुरू होने पर राज्यपाल ने इशारा कर रुकवा दिया। शोभा यात्रा पूरी होने के बाद सभी संकाय सदस्यों के बैठने के बाद दोबारा राष्ट्रगीत शुरू हुआ।
अक्तूबर में शुरू होगा 12 विभागों में बच्चों का इलाज
पीजीआई निदेशक डॉ. आरके धीमन ने कहा कि संस्थान में बन रहे 573 बेड वाले एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर के पहले चरण में 12 विभागों के 293 बेड पर अक्तूबर में बच्चों का इलाज शुरू होगा। पांच हजार करोड़ रुपये से गंभीर और दुर्लभ रोगियों के लिये क्वार्टनरी स्वास्थ्य (चतुर्थक स्वास्थ्य-देखभाल) केंद्र पर काम शुरू हो गया है। यहां जटिल ऑपरेश्न, लिवर, हार्ट, किडनी समेत दूसरे अंग काम न करने वाले गंभीर रोगियों को उच्च स्तरीय इलाज मिलेगा। यहां रोगियों को प्रोटॉन, सेलुरल थेरेपी, ईसीएमओ, उन्नत न्यूरो-इंटरवेंशनल, सटीक ऑन्कोलॉजी की सुविधा मिलेगी। इसे पांच वर्ष में इसे पूरा किया जाएगा। इसके अलावा संस्थान की उपलब्धियां गिनायीं।
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पदक पाने वाले संकाय सदस्यों की बातचीत
मेरे 370 शोध प्रकाशन प्रकाशित हो चुके हैं। प्रदेश सहित कई राज्यों के 15 से अधिक संस्थानों में किडनी प्रत्यारोपण कार्यक्रम शुरू कराए हैं। प्रदेश के उन सरकारी संस्थानों में भी किडनी प्रत्यारोपण सेवाएं शुरू कराना है जहां पर अभी सुविधा नहीं है। गवर्नर मेडल फार बेस्ट टीचर का पुरस्कार मिलना गर्व की बात है।
प्रो. नारायण प्रसाद, नेफ्रोलॉजी विभागाध्यक्ष
न्यूरोसर्जरी में विभाग में बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर तैनात हूं। मुझे रिसर्च के क्षेत्र में प्रो. एसएस अग्रवाल अवाॅर्ड से सम्मानित किया गया है। यह अवाॅर्ड पाकर मुझे काफी खुशी हो रही है। मेरे पिता शिक्षक व मां गृहिणी हैं। आगे समाज की सेवा के लिए काम करना है। - डॉ. अभिषेक शुक्ला
एंडोक्राइन सर्जरी में एमसीएच किया है। बेस्ट एचसीएच के लिए प्रो. आरके धर्मा अवाॅर्ड मिला है। सबसे कम उम्र में अपना पेपर इंटरनेशनल लेवल पर रिप्रजेंट किया है। आगे मुझे गवर्नमेंट हॉस्पिटल में ही काम करना है। फिलहाल तो यहीं पर अपनी सेवाएं दे रही हूं। मेरे पिता संजय डारिया बैंक मैनेजर और मां प्रीति गृहणि हैं। - डॉ. सम्प्रति डारिया
प्रो. एसएस अग्रवाल अवाॅर्ड पाकर बेहद खुशी हो रही है। जो कि मुझे संयुक्त रूप से रिसर्च के लिए मिला है। मेरे पिता रतन कुमार शुक्ला सरकारी अध्यापक और मां प्रतिभा शुक्ला गृहिणी हैं। - खुशी शुक्ला