फसल का उत्पादन कम होने और लागत भी न निकल पाने से किसानों का दिल बैठा जा रहा है। वह यह सदमा बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं और उनकी मौत का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। बीते 24 घंटों में सूबे में 41 किसानों की सदमे से मौत हो गई, जबकि नौ ने आत्महत्या कर ली।
बृहस्पतिवार को मुरादाबाद मंडल में आठ किसानों की सदमे से मौत हो गई, जबकि रामपुर में कर्ज के बोझ के तले दबे किसान ने जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या कर ली।
लखीमपुर खीरी जिले के ओयल में किसान ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली, वहीं बीते चौबीस घंटे में बरेली मंडल के पीलीभीत और शाहजहांपुर में तीन-तीन और बदायूं और बरेली में एक-एक और किसान की मौत हो गई।
अवध में बृहस्पतिवार को छह किसानों की फसल बर्बाद होने के चलते सदमे से असमय मौत हो गई, जबकि रायबरेली के एक किसान ने ट्रेन के आगे कूदकर जान दे दी। सेंट्रल यूपी में छह और किसानों की मौत हो गई। बांदा में कर्ज अदायगी को लेकर बैंक के दबाव के बाद किसान ने फांसी लगाकर जान दे दी। पांच अन्य किसानों की सदमे से मौत हुई।