सीतापुर। शूटर संजय तिवारी उर्फ अकील खान ने महज 22 सालों में ही अपराध की दुनिया में काफी दबदबा बना लिया था। छोटा भाई राजू तिवारी उर्फ रिजवान भी अपने बड़े भाई के रास्ते पर चला। संजय पर जहां 24 मुकदमे दर्ज हैं। वहीं राजू का 14 आपराधिक मामलों में नाम आया। दोनों भाइयों से हुई मुठभेड़ में पुलिस की चार गोलियों से उनके आतंक का अंत हो गया। दोनों भाइयों को दो-दो गोलियां लगीं।
शूटर संजय तिवारी उर्फ अकील खान पर 2003 में हरदोई की शहर कोतवाली में सबसे पहले चोरी का एक केस दर्ज हुआ था। मामले में अकील की गिरफ्तारी हुई थी। जेल से बाहर आने के बाद से संजय की गतिविधियां तेज हो गईं। इसके बाद हरदोई में चोरी, लूट, धोखाधड़ी के मामले में भी अकील का नाम सामने आया।
वर्ष 2006 में माधोगंज में एक हत्या के प्रयास का केस दर्ज हुआ।
उसमें एक पिकअप चालक पर फायरिंग का आरोप था। वर्ष 2011 में दिसंबर में मछरेहटा के पेरियाकोडर गांव के देवी दयाल शुक्ला हत्याकांड ने सबके रोंगटे खड़े कर दिए। पेरियाकोडर गांव निवासी देवी सहाय शुक्ला की गांव के ही सतीश मिश्रा से दुश्मनी थी।
सतीश व देवी दयाल के बीच अक्सर वर्चस्व का विवाद रहा। सतीश ने अपने साथी संजय तिवारी व उसके भाई राजू तिवारी को अपने गांव बुलाया।
सभी सुबह करीब चार बजे देवी दयाल के घर पहुंचे। उसे आवाज दी। जैसे ही देवी दयाल बाहर आया। उस पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। सतीश अभी भी हत्या के आरोप में जेल में बंद है। संजय पर हरदोई, सीतापुर, लखीमपुर खीरी, बलरामपुर व गौतमबुद्धनगर में हत्या, हत्या का प्रयास, चोरी, लूट व अन्य गंभीर मामले दर्ज हैं।