यूपी में हर 24 घंटे में 22 बच्चों की मौत हो जाती है। बच्चों की मौतों का प्रमुख कारण कुपोषण है। परिवार के लोग गर्भवती और नवजात बच्चे की देखभाल अच्छे से करें तो स्थितियां बेहतर हो सकती हैं।
यह बात नेशनल हेल्थ मिशन के निदेशक अमित घोष ने कही। वे यूपी फोर्सेस और सेव द चिल्ड्रेन के सहयोग से सोमवार को इंदिरागांधी प्रतिष्ठान में ‘बाल्यावस्था देखरेख एवं विकास’ पर आयोजित सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि बाल स्वास्थ्य को देखते हुए स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार तेजी से हो रहा है और आने वाले समय में ये आंकड़ा तेजी से कम होगा।
देश में प्रति वर्ष 52 लाख बच्चे जन्म लेते हैं जिसमें से काफी बच्चे समय पर इलाज न मिल पाने के चलते मौत के गाल में समा जाते हैं। उन्होंने कहा कि पौष्टिक आहार और समय पर सही इलाज के साथ नियमित स्वास्थ्य की जांच की जाए तो बच्चों की मौतों का आंकड़ा कम किया जा सकता है।
यह है प्रमुख कारण
कार्यक्रम में मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए यूपी फोर्सेस के राज्य संचालक रामायण यादव ने कहा कि कुपोषण बच्चों की मौत का प्रमुख कारण है। गर्भवती को पौष्टिक आहार मिले और उसकी अच्छी देखभाल की जाए तो कई बच्चों की जिंदगी बचाई जा सकती है।
सेव द चिल्ड्रेन के प्रतिनिधि सुनील कुमार ने कहा कि कुपोषण के चलते महिलाएं खून की कमी का शिकार हो रही हैं और इस वजह से प्रसव के दौरान जच्चा-बच्चा की मौत की घटनाएं होती हैं।
कार्यक्रम में मौजूद सपा नेता जूही सिंह ने कहा कि बच्चे देश और प्रदेश के भविष्य हैं और उनकी स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए सरकार लगातार काम कर रही है।
कार्यक्रम में पहुंचे विशेषज्ञों ने बताया कि वर्ष 2005 में पूरे विश्व में पांच साल से कम उम्र के 2.3 मिलियन बच्चों की मौत निमोनिया और डायरिया की वजह से हुई थी।
कुपोषण से लड़ने के लिए टीम
एनएचएम निदेशक अमित घोष ने बताया कि कुपोषण से होने वाली मौतों पर रोक लगाने के लिए एएनएम, आंगनबाड़ी और एएनएम कार्यकर्ताओं की टीम बनाई जा रही है।
टीम के सदस्य घर-घर जाकर आंकड़े जुटाएंगे और गर्भवती को कुपोषण से बचाव के तरीके बताएंगे। इसी तरह सीएचसी और महिला अस्पतालों से प्रसव और बच्चों की देखरेख की जानकारी के लिए 150 नर्सों की टीम बनाई जा रही है।
उन्होंने कहा कि बच्चों को छह महीने तक मां का गाढ़ा दूध अमृत के समान होता है। यह बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाता है।
प्रदेश भर में काम कर रही सवा लाख आशाएं
स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने के लिए प्रदेश भर के अस्पतालों में करीब नौ हजार बेड बढ़ाए जाएंगे। अलग-अलग जिलों में छह अस्पतालों का निर्माण कार्य जारी है।
लखनऊ में भी गोमतीनगर विस्तार में 200 बेड के बाल महिला चिकित्सालय समेत कई बीएमसी का निर्माण जारी है। उन्होंने बताया कि प्रदेश भर में सवा लाख आशाएं काम कर रही हैं।
20 हजार आशाओं को और जोड़ा जाएगा। कार्यक्रम में बताया गया कि कुछ वर्ष पहले तक अस्पतालों में प्रसव का आंकड़ा सात लाख था जो अब 24 लाख हो गया है। इससे मौतें कम हुई हैं।