रायबरेली। शहर के प्रतिष्ठित स्कूलों के खटारा वाहनों से नौनिहालों को ढोया जा रहा है, जिससे उनकी जान को खतरा है। बिना परमिट व फिटनेस के साथ ही 15 वर्ष की आयु पूरी कर चुकीं बसों से भी बच्चों को स्कूल लाया और ले जाया जा रहा है। सोमवार को एआरटीओ (प्रवर्तन) संदीप कुमार जायसवाल ने अभियान चलाया तो स्कूल संचालकों की मनमानी उजागर हो गई। इस दौरान 22 स्कूली वाहनों का चालान कर तीन को सीज कर दिया गया।
एक महीने पहले सभी स्कूलों के संचालकों को निर्देश दिए गए थे कि बच्चों को लाने और ले जाने में लगे वाहनों को मानक के अनुरूप कर लिया जाए। साथ ही मानकों को पूरा न करने वाले वाहनों से बच्चों को स्कूल न लाया जाए। इसी को लेकर सोमवार को एआरटीओ (प्रवर्तन) ने शहर में स्कूली वाहनों की जांच की। किसी बस का परमिट नहीं मिला तो किसी का फिनटेस लंबे समय से नहीं कराया गया। यही नहीं, कई ऐसे वाहन भी पकड़ में आए जिनकी उम्र 15 साल पूरी हो चुकी है, लेकिन अवैध रूप से उनका संचालन कराया जा रहा था।
एआरटीओ ने मानकों की अनदेखी कर चलाए जा रहे हेमकुंड पब्लिक स्कूल, जीबीएस पब्लिक स्कूल, एसजेएस पब्लिक स्कूल, रॉयन इंटरनेशनल स्कूल, बीएसएस पब्लिक स्कूल, रामा कृष्णा पब्लिक स्कूल समेत अन्य विद्यालयों के 22 वाहनों का चालान कर दिया। इसमें तीन वाहनों को सीज कर दिया गया। इस कार्रवाई के बाद स्कूलों के संचालकों में हड़कंप मच गया है।
नहीं सुधरे तो कराएंगे एफआईआर
स्कूलों के संचालकों को एक माह का समय दिया गया था कि स्कूली वाहनों के मानकों को पूरा करा लेें, लेकिन स्कूल संचालक मनमानी से बाज नहीं आ रहे हैं। 22 वाहनों पर कार्रवाई की गई है। दोबारा बिना परमिट व फिटनेस और उम्र पार कर चुके वाहनों से बच्चों को स्कूल लाया गया तो संबंधित स्कूलों के संचालकों पर एफआईआर की जाएगी।
- संदीप कुमार जायसवाल, एआरटीओ (प्रवर्तन)