बहराइच। शहरी विकास मंत्रालय ने स्वच्छ भारत मिशन के तहत जिलों में स्वच्छता अभियान को लेकर बीते मह सर्वे कराया था। टीमों ने जिले के चार निकायों में सर्वे का काम किया था।
सर्वे में सफाई कर्मियों द्वारा ड्यूटी में लापरवाही बरते जाने की बात सामने आई। वहीं कचरा निस्तारण की जगह और खुले में शौच की प्रथा शहरी इलाकों में खत्म नहीं होने की बात सामने आई। जिससे स्वच्छता रैंकिंग में बहराइच शहर पिछड़ गया है।
नीति आयोग ने उत्तर प्रदेश के आठ जनपदों को सर्वाधिक पिछड़ा जिला घोषित किया था। इसमें बहराइच को भी शामिल किया गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आठ जनपदों के जिलाधिकारियों के साथ तीन माह पूर्व बैठक भी की थी।
जिसमें बहराइच के तत्कालीन डीएम अजयदीप सिंह भी शामिल होने गए थे। केंद्रीय शहर भी विकास मंत्रालय ने स्वच्छ भारत मिशन की योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए प्रदेश के 35 नगर निकायों का सर्वे कराया था।
जनवरी माह में केंद्र सरकार से आई टीम ने रिसिया, नानपारा और बहराइच नगर पालिका का सर्वे किया था। जरवल में भी टीम ने हर वार्ड का सर्वे किया था। इसमें कार्यालय में रखरखाव से लेकर अन्य कार्यों के लिए नंबर आवंटित किए गए थे।
सफाई व्यवस्था के अभाव में बहराइच को नंबर काफी कम मिले। जिससे रैंकिंग ककी दौड़ में बहराइच पीछे रह गया।
गौरतलब हो कि बहराइच शहर से निकलने वाले कूड़े के निस्तारण के लिए आधे दशक से नगर पालिका परिषद जमीन की तलाश कर रहा है। लेकिन अब तक जमीन नहीं मिल सकी है। जिस कारण शहर का कूड़ा सड़क किनारे फेंका जा रहा है।