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57 लाख रुपये के घोटाले में बाबू पर एफआईआर

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57 लाख के घोटाले में बाबू पर एफआईआर
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रायबरेली। ईवीएम सुरक्षित रखने के लिए गोदाम बनाने को चुनाव आयोग से जारी 57 लाख से अधिक का बजट डकारने के मामले में चुनाव कार्यालय का संबंधित बाबू दोषी पाया गया है।


उसके खिलाफ सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी ने सदर कोतवाली में एफआईआर दर्ज करा दी है। अभी घोटाले की जांच जारी है।


कई और घपले व बाबू के कारनामे उजागर हो सकते हैं। तत्कालीन एडीएम वित्त एवं राजस्व भी जांच के दायरे में हैं क्योंकि उन्हीं की तैनाती के दौरान यह घोटाला हुआ था।
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विधानसभा क्षेत्रवार इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीनों को रखने के लिए कलेक्ट्रेट में गोदाम बनाने के लिए आयोग से 1.22 करोड़ रुपए दिए गए थे जिसमें जिला प्रशासन ने 1.15 करोड़ से गोदाम बनवाने की स्वीकृति दी थी।


फरवरी 2017 में निर्माण इकाई ने पहली किस्त की धनराशि खर्च करके जिला प्रशासन से दूसरी किस्त के 58 लाख की डिमांड की थी जिसके बाद घोटाले की कलई खुली थी। मामले में संबंधित बाबू मो. वसी प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया था। बाबू का तबादला अमेठी जिले के लिए कर दिया गया था।
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आयोग के आदेश पर सीडीओ राकेश कुमार व सिटी मजिस्ट्रेट आलोक कुमार समेत तीन अधिकारियों की टीम ने घोटाले की जांच शुरू की थी।


जांच में घोटाले की पुष्टि होने के बाद सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी एमके श्रीवास्तव ने सदर कोतवाली में तहरीर देकर बाबू मो. वसी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया है।


सिटी मजिस्ट्रेट आलोक कुमार ने बताया कि मामले में दोषी बाबू वसी के खिलाफ एफआईआर करा दी गई है, जांच की जा रही है।


जितने भी लोग दोषी मिलेंगे, सभी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। तत्कालीन एडीएम के बारे में पूछने पर कहा कि जांच चल रही है।
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