बाराबंकी। बगैर किसी भेदभाव, नि:स्वार्थ व कर्मठता के बल पर कई प्रत्याशी बिना किसी दल के चुनाव लड़े और जीत भी दर्ज की। वहीं जनता ने भी पार्टी व सिंबल छोड़ निर्दलीयों को जिताकर व्यक्तित्व को तरजीह देकर साबित कर दिया कि अच्छी सोच, निष्पक्ष कार्यशैली, ईमानदारी से कार्य करने वाले लोग चुनाव जीतें। जहां विशेष वर्ग का बहुमत ज्यादा था तो उसी वर्ग के कई प्रत्याशियों ने भी अपनी ताल ठोंकी और मुंह की भी खानी पड़ी। निर्दलीय उम्मीदवारों ने पहली व दूसरी बार भी दलीय उम्मीदवारों को करारी शिकस्त देकर अपनी लोकप्रियता साबित की है।
निष्पक्ष कार्य कराने से बना लगाव
नगर पंचायत फतेहपुर में दूसरी बार रेशमा मशकूर बिना किसी पार्टी के सिंबल पर चुनाव लड़ीं और भारी मतों से विजयी हुईं। चेयरमैन रेशमा बताती हैं कि उनके परिवार में 1952 से अध्यक्ष की कुर्सी आज भी कायम है। कस्बा निवासी राजमणि मिश्रा बताते हैं कि सरल स्वभाव व लोगों के बीच किसी प्रकार की दूरी न मानने वाले इस परिवार की लोकप्रियता इसी वजह से कायम है। बिना भेदभाव व निष्पक्ष कार्य करने की वजह से लोगों का लगाव बराबर बना है। बुजुर्ग गुफरान ने बताया कि जातपांति से ऊपर उठकर स्वच्छ समाज व विकास का मुद्दा ही इन्हें बराबर जीत दिलाता है।
योजनाओं का लाभ दिलाने से फिर मिली कुर्सी
मुस्लिम बाहुल्य नगर पंचायत जैदपुर में इससे पहले रियाज अहमद ने निर्दलीय चुनाव लड़कर जीत हासिल की थी। अबकी बार महिला सीट होने पर उन्होंने अपनी बहन चांदबीबी को निर्दलीय मैदान में उतारा और उन्हें भी जिताने में सफल रहे। कस्बे के हाजी सगीर, खालिद व बब्लू जायसवाल कहते हैं कि हर जरूरी कार्य को अहमियत देकर उसे हर हाल में पूरा करना, योजनाओं का लाभ हर पात्र को दिलाने की वजह से जनता का लगाव उनसे बढ़ता गया। किसी जाति विशेष के बजाए पात्रों को हक दिलाने के कारण जनता ने सभी दलों को नकार कर एक बार फिर उन्हें कुर्सी सौंप दी।
आचरण व कार्य के बल पर जीते
अपने आचरण, स्वभाव व कार्य के बल पर नूर आलम सभासद से दरियाबाद के चेयरमैन तक का सफर बिना किसी पार्टी के सिंबल के तय किया है। कस्बे के मयाराम गौतम का कहना है कि मुस्लिम बाहुल्य इस क्षेत्र में जातीय गणित के बजाए लोगों ने विकास कराने की ललक देख इन्हें मौका दिया है। जहां मुस्लिम वर्ग से सपा, कांग्रेस ने भी अपने प्रत्याशी उतारे थे। भाजपा की लहर भी संजय जायसवाल को जिता नहीं सकी। मतीन अहमद, फहद आदि बताते हैं कि सभासद रहते जो कार्य व व्यवहार लोगों के बीच स्थापित किया जिससे आज जनता ने बड़ी पदवी देकर सम्मानित किया है।
मिलनसार होने से लोगों ने दी तरजीह
भाजपा प्रत्याशी को करारी शिकस्त देने वाले निर्दल प्रत्याशी बद्री विशाल को जनता ने पिछली बार की हार को इस बार जीत में बदल दिया। डॉ. सलीम बताते हैं कि मुस्लिम वर्ग भाजपा के बजाए किसी और को जिताना चाहता था, सपा से प्रत्याशी न होना व बिना दल के बद्री विशाल जैसा व्यक्तित्व पाकर सभी ने उन्हें चुना है। वहीं नारायण उपाध्याय ने बताया कि पिछली बार उनके चुनाव हारने का मलाल जनता को भी था। मिलनसार स्वभाव व अच्छा निर्णायक होने की वजह से जनता ने इन्हें तरजीह दी है।
व्यक्तित्व व काम करने के जुनून से मिली सफलता
नगर पंचायत देवा में नगर निकाय चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर साहबे आलम वारसी ने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज कराई। इनकी जीत के पीछे उनका व्यक्तित्व और काम करने के जुनून है। यहीं के महादेव प्रसाद हों या फिर फिरदौस अहमद सभी कहते हैं कि शिक्षित, निपुण कार्यशैली, हर जरूरतमंद के काम आना ही उन्हें लोग पसंद करते हैं। यहां की जनता दल विशेष को नहीं बल्कि कस्बे में सौहार्द कायम रखने, निष्पक्ष कार्य कराने वाले को ही अपना चेयरमैन चुनता है जो जनता ने दूसरी बार साबित कर दिखाया है।
हर सुख-दुख में शामिल होकर जीता लोगों का दिल
बंकी नगर पंचायत में अंशू सिंह ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में दोबारा जीत हासिल की। जातीय समीकरण देखा जाए तो यहां पर हिंदू वोट करीब 11 हजार व मुस्लिम वोट करीब आठ हजार के आसपास है। हिंदू वर्ग से तीन प्रत्याशी व मुस्लिम से चार प्रत्याशियों ने अपनी दावेदारी प्रस्तुत की थी। जनता के हर सुख दुख में शामिल होना व सभी को गले लगाकर अभिवादन करना लोगों को पसंद आया और दोबारा जीत हासिल की। पिछले कार्यकाल में भले ही सभासदों ने सामूहिक बहिष्कार किया हो पर जनता ने उनके व्यवहार को देखते दलीय प्रत्याशियों को छोड़ अंशू सिंह को चुना है।