ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार गोंडा शाखा में यह वित्तीय अनियमितताएं दिसंबर 2021 से जून 2025 के बीच विभिन्न चरणों में हुईं। इस अवधि में तैनात रहे अलग-अलग शाखा प्रबंधकों और कर्मचारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में पाई गई है। इसी आधार पर एफआईआर में कुल 16 लोगों को नामजद किया गया है, जिनमें तीन तत्कालीन शाखा प्रबंधक, सहायक/कैशियर और खाताधारक शामिल हैं।
पुलिस बैंक के सभी संदिग्ध खातों, ऋण फाइलों, डिजिटल ट्रांजैक्शन और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की गहन विवेचना कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच में यदि और नाम सामने आते हैं तो उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
निगरानी तंत्र पर उठे सवाल
21 करोड़ से अधिक के इस घोटाले ने सहकारी बैंकिंग व्यवस्था की निगरानी और आंतरिक नियंत्रण प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बैंक उपभोक्ताओं और खाताधारकों में अपने धन की सुरक्षा को लेकर चिंता है, वहीं प्रशासनिक स्तर पर भी इस पूरे मामले को अत्यंत गंभीरता से लिया जा रहा है।
इन 16 लोगों के खिलाफ दर्ज एफआईआर
| पवन कुमार पाल |
तत्कालीन शाखा प्रबंधक |
| अजय कुमार |
तत्कालीन शाखा प्रबंधक |
| सुशील कुमार गौतम |
तत्कालीन शाखा प्रबंधक |
| पवन कुमार |
तत्कालीन सहायक/कैशियर |
| सुमित्रा पाल |
खाताधारक |
| संजना सिंह |
खाताधारक |
| राज प्रताप सिंह |
खाताधारक |
| जय प्रताप सिंह |
खाताधारक |
| फूल मोहम्मद |
खाताधारक |
| राघव राम |
खाताधारक |
| शिवाकान्त वर्मा |
खाताधारक |
| रितेन्द्र पाल सिंह |
खाताधारक |
| गीता देवी वर्मा |
खाताधारक |
| दुष्यन्त प्रताप सिंह |
खाताधारक |
| मोहम्मद असलम |
खाताधारक |
| प्रतीक कुमार सिंह |
खाताधारक |