बाराबंकी। 15 अक्तूबर के बाद से तापमान में गिरावट के बाद पड़ने वाली ठंडक इस बार किसानों को मायूस किए है। इस बार पुरवा हवाओं के चलते तापमान गिर नही रहा तो गुलाबी ठंड के समय लोगों को पसीने आ रहे है। ऐसे में रबी की बुआई पर संकट छा गया है। जमीन में नमी न होने के कारण किसान आलू व गेहूं की बोआई तो कर रहे है। मगर, बीज अंकुरित होने में लग रहे समय को लेकर परेशान है।
जिले में गेेहूं की बोआई नवम्बर की बजाय धान की कटाई होते ही अक्तूबर माह में शुरू कर देते है। तो आलू की बोआई का समय भी इस समय मुफिद चल रहा है। इस बार मौसम वैज्ञानिकों के पूर्वानुमान भी मौसम के बेरूखी के आगे धरे रह गए। रजाई व कंबल लेने के समय लोगों के घरों में एसी व कूलर चल रहे है। उधर, धान कटाई के बाद किसानों को खेत में नमी न होने के कारण खेतों की छपाई कर उसकी जोताई करनी पड़ रही है। उसके बाद भी जमीन में नमी न होने के कारण आलू व गेहू की बोई गई फसल में बीज अंकुरित होने में काफी विलम्ब होने से किसान परेशान है। पिछले तीन सालों में 15 अक्टूबर से पहले जिले का तापमान अधिकतम 35 डिग्री सेल्सियस तो न्यूनतम 23 डिग्री सेल्सियस रहता था। उसके बाद से गिरने लगता था। मगर, इस बार अभी भी तापमान गिरने की बजाय बढ़ता जा रहा है।
वर्जन
इस बार पुरवा हवाओं के कारण मौसम में अभी नमी नही आई है। पछुवा हवाओं केे चलने से ठंड की दस्तक के साथ जमीन में नमी आएगी। ऐसी स्थित में तिलहन व दलहन की बोआई पर तो नही मगर, आलू व गेहूं की बोआई को लेकर किसानों को दिक्कत जरूर हो रही है।
राजाराम राय, मृदा रसायनज्ञ, कृषि विभाग