करीब 17 साल पहले 14 अगस्त 2000 की रात फैजाबाद से लखनऊ जा रही साबरमती एक्सप्रेस में करीब 11 बजे रौजागांव रेलवे स्टेशन पर बम विस्फोट हुआ था।
इस घटना में 11 यात्रियों की मौत हो गई थी वहीं 40 घायल हुए थे। पुलिस व खुफिया एजेंसियों ने इस मामले में जीआरपी बाराबंकी में हत्या, हत्या के प्रयास के अलावा, देशद्रोही गतिविधियों में केस दर्ज किया था।
पुलिस ने साजिश रचने के आरोप में गुलजार वानी व सिमी के सक्रिय कार्यकर्ता अहमद मुबीन, मारूफ व मोहम्मद आकिल को पकड़ा था। इन आरोपियों ने वारदात को अयोध्या में विवादित ढांचा विध्वंस करने का बदला बताया था।
शनिवार को बाराबंकी सेशन कोर्ट द्वारा बेटे गुलजार वानी को रिहा करने के बाद उसके पिता गुलाम मोहम्मद वानी ने इसे देर से ही सही, पर इंसाफ की जीत बताया है।
लेकिन उन्हें मलाल इस बात का है कि जब गुलजार 12 साल की उम्र में कश्मीर छोड़ अपना भविष्य बनाने यूपी आया, पहले आजमगढ़ और फिर एएमयू अलीगढ़ में तालीम हासिल की, दो बार नेट पास कर चुका था, ऐसे में उस पर आतंकी होने का आरोप कैसे लग गया?
यह बातें उनकी समझ से परे हैं। अमर उजाला से बातचीत में गुलाम मोहम्मद ने कहा, उन्हें अपने बेटे के खराब हो चुके 16 वर्षों के लिए किसी सरकार से मुआवजा नहीं चाहिए लेकिन वह चाहेंगे कि अल्लाह की अदालत में इन 16 वर्षों का इंसाफ उन्हें मिले।