अफसरों की सहमति से बिलिंग सिस्टम के सॉफ्टवेयर में प्रावधान किया है कि एक किलोवाट कनेक्शन का एक महीने का अधिकतम 800 यूनिट का ही बिल बन सकेगा। जैसे ही 801 यूनिट फीड होती है, सिस्टम सीलिंग के जरिये तय 1500 यूनिट प्रति किलोवाट का खुद बिल बना देता है।
लोड अधिक होने पर 1500 यूनिट प्रति किलोवाट की दर से एसेसमेंट हो जाता है। सीलिंग के बिल का मतलब है कि अधिशासी अभियंता, उपखंड अधिकारी कनेक्शन स्थल और मीटर की जांच कराकर देखें कि बिल पर जो रीडिंग अंकित है वह सही है या गलत। फिर सही रिपोर्ट देकर बिल संशोधित कर घर तक भेजवाए।
बिल ठीक कराने के नाम पर उगाही
सीलिंग का बिल जैसे ही एक लाख से ऊपर पहुंचता है, उपकेंद्र कर्मचारी वसूली के लिए पहुंच जाते हैं। सीलिंग का जो बिल एक लाख का बनता है, असल में वह छह से सात हजार रुपये का होता है। इसे ठीक कराने के नाम पर 20 से 25 हजार रुपये तक की उगाही होती है।