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उपभोक्ताओं की जेब काटने को चल रहा सीलिंग बिल बनाने का खेल, 2 हजार का बिल ऐसे पहुंचता है एक लाख

Wed, 30 Sep 2020 12:33 AM IST
लखनऊ ब्यूरो नरेश शर्मा, अमर उजाला, लखनऊ
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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केस-1

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एक माह का 35 हजार का बिजली बिल
ठाकुरगंज खंड में रामप्यारी निगम (खाता नंबर 9259590000) ने फरवरी में 2045 रुपये का बिल भरा। उस वक्त मीटर की रीडिंग बिल पर 2573 दर्ज थी। इसके बाद कोई रीडिंग नहीं हुई। अब उनका सितंबर का बिल 34,544 रुपये का बन गया है। सिस्टम ने तीन किलोवाट के कनेक्शन का सीलिंग में बिल बनाया है, जिसकी बकाया रकम 2,34,000 रुपये है।

बिजली उपभोक्ताओं से रकम ऐंठने के लिए लखनऊ में सीलिंग बिल बनाने का धंधा चल रहा है। इसमें चलते मीटर बिल पर खराब या बंद दर्शा दिया जाता है। इससे 300 यूनिट का जो वह हर माह करीब 2042 रुपये बिल जमा करता है, वह चंद महीने में एक लाख रुपये का बन जाता है। इस खेल को बिलिंग की परिभाषा में सीलिंग का बिल कहते हैं।

 

इसमें अफसर और कंपनी के मीटर रीडर में सांठगांठ होती है। वहीं, बिल ठीक करने वाला बाबू भी संलिप्त होता है। मीटर रीडर पहले हर महीने बिल 10 से 20 यूनिट का बनाता है और फिर चार-छह माह बाद अचानक तीन से आठ हजार यूनिट तक रीडिंग फीड कर देता है।

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इसके साथ सीलिंग में बिल बनने लगता है। एक किलोवाट पर कम से कम 1500 यूनिट का 10,642 रुपये का बिल बनाकर भेजा जाता है। दो किलोवाट पर बिल 23,578 रुपये का बन जाता है। यानी चार माह में दो किलोवाट का सीलिंग का बिल एक लाख रुपये तैयार हो जाता है

बिलिंग सिस्टम के सॉफ्टवेयर में किया गया प्रावधान

अफसरों की सहमति से बिलिंग सिस्टम के सॉफ्टवेयर में प्रावधान किया है कि एक किलोवाट कनेक्शन का एक महीने का अधिकतम 800 यूनिट का ही बिल बन सकेगा। जैसे ही 801 यूनिट फीड होती है, सिस्टम सीलिंग के जरिये तय 1500 यूनिट प्रति किलोवाट का खुद बिल बना देता है।

लोड अधिक होने पर 1500 यूनिट प्रति किलोवाट की दर से एसेसमेंट हो जाता है। सीलिंग के बिल का मतलब है कि अधिशासी अभियंता, उपखंड अधिकारी कनेक्शन स्थल और मीटर की जांच कराकर देखें कि बिल पर जो रीडिंग अंकित है वह सही है या गलत। फिर सही रिपोर्ट देकर बिल संशोधित कर घर तक भेजवाए। 

बिल ठीक कराने के नाम पर उगाही
सीलिंग का बिल जैसे ही एक लाख से ऊपर पहुंचता है, उपकेंद्र कर्मचारी वसूली के लिए पहुंच जाते हैं। सीलिंग का जो बिल एक लाख का बनता है, असल में वह छह से सात हजार रुपये का होता है। इसे ठीक कराने के नाम पर 20 से 25 हजार रुपये तक की उगाही होती है।    
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मानक पर एक नजर

एक किलोवाट कनेक्शन पर 30 दिन में बिजली खपत   720 यूनिट               
एक किलोवाट पर सीलिंग की असेसमेंट यूनिट  1500 यूनिट                                        
तीन किलोवाट के कनेक्शन पर सीलिंग असेसमेंट यूनिट  4500 यूनिट

सीलिंग के बनने वाले बिजली बिल को संशोधित कर उपभोक्ताओं को रिसीव कराने के बाद उसकी रिपोर्ट मांगी गई। इसके आधार पर फिर जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी।  - सूर्यपाल गंगवार, प्रबंध निदेशक, मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लखनऊ       
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