महराजगंज-डीह (रायबरेली)। माइनरों की सिल्ट सफाई के नाम पर हुई गड़बड़ी की पोल पानी छोड़ते ही खुलने लगी है। महराजगंज और सलोन ब्लॉक क्षेत्र में बुधवार को माइनर की पटरियां कटने से दो सौ बीघा खेत में लगी फसल जलमग्न हो गई। इसकी सूचना के बाद भी नहर विभाग का कोई कर्मचारी टूटी पटरियों की मरम्मत के लिए मौके पर नहीं पहुंचा। इसके बाद मौके पर जुटे किसानों ने ही किसी तरह कटान को बंद पानी का बहाव रोका।
महराजगंज ब्लॉक क्षेत्र में सारीपुर रजबहा से ओनई जंगल माइनर निकली है। इसकी लंबाई तीन किमी. है। माइनर नैया नाले में जाकर मिली है। चार दिन पहले माइनर में पानी छोड़ा गया। इसकी सिल्ट सफाई में बरती गई लापरवाही के कारण बल्दी मजरे बघई अहलवार गांव के पास इसकी पटरी कट गई। इससे आसपास फैले 150 बीघा खेतों में पानी भर गया।
इससे खेतों में खड़ी 150 बीघा गेहूं व सरसों की फसल जलमग्न हो गई। विभाग की तरफ से मरम्मत कार्य न किए जाने पर किसानों ने खुद ही जेसीबी की मदद से कटान को रोका। सहायक अभियंता सौरभ चौधरी ने बताया कि पटरी कटने की जानकारी के बाद माइनर का पानी रोक दिया गया है।
उधर, सलोन ब्लॉक क्षेत्र के खौसनहा मजरे सूची गांव के पास माइनर की पटरी करने से 50 बीघा से ज्यादा फसल जलमग्न हो गई। किसान रामसमुझ, अवधेश कुमार, शिव कुमार तिवारी, राजू यादव ने बताया कि माइनर में टेल तक सफाई नहीं कराई गई। पानी छोड़ने पर खौसनहा गांव के पास पटरी कट गई।
सलोन क्षेत्र में पांच दिन पहले भी पहाड़गढ़ माइनर कटने से 500 बीघा खेत जलमग्न हो गए थे। किसानों ने बताया कि माइनर की उन स्थानों पर ठीक से सफाई कराई जाती, जहां सड़क को काटती है। उसके बाद टेल भाग की कभी सफाई नहीं कराई जाती, यही वजह है कि जब पानी छोड़ा जाता है, तब पटरी कट जाती है।