कानपुर स्थित राजकीय बाल संरक्षण गृह में संवासिनियों के गर्भवती होने का प्रकरण सामने आने के बाद महिला कल्याण एवं बाल विकास विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में चल रहे संरक्षण गृहों में 20 महिलाएं व बालिकाएं गर्भवती हैं। सभी संरक्षण गृहों में आने के समय से ही गर्भवती हैं।
वर्तमान में प्रदेश में 17 राजकीय बाल गृह (बालिका) व राजकीय महिला शरणालयों में पॉक्सो अधिनियम से संबंधित अपराधों से पीड़ित 257 बालिकाएं व महिलाएं रह रही हैं। महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) स्वाती सिंह ने मंगलवार को सभी जिला प्रोबोशन अधिकारियों के साथ ऑनलाइन बैठक की, जिसमें यह तथ्य सामने आए हैं। विभाग ने कहा है कि जिन आश्रय गृहों में महिलाएं व बालिकाएं रहती हैं, उनमें सुरक्षा के पूरे इंतजाम हैं।
दरअसल, कानपुर में कुछ नाबालिगों के गर्भवती होने की बात सामने आने के बाद कई तरह की चर्चाएं हो रही थीं। इस पर सोमवार को राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष विमला बॉथम ने डीएम कानपुर नगर से फोन पर बात की थी और उनसे पूरी जांच आख्या मांगी थी।
विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि बालिकाओं के संरक्षण केंद्र की क्षमता में इजाफे की आवश्यकता है। मंत्री ने डीपीओ कानपुर को निर्देशित किया है कि जिस तरह की भ्रामक स्थिति कानपुर को लेकर आई है, वह दोबारा न हो, इसके लिए बातचीत का माहौल तैयार किया जाए और वास्तविकता सामने रखी जाए।