राजधानी में बुखार का बढ़ता प्रकोप अब डराने लगा है। इससे सबसे ज्यादा बच्चे प्रभावित हैं। फैजुल्लागंज इलाके में बृहस्पतिवार को 20 और बच्चे इसकी चपेट में आ गए।
इनमें से कई का घर पर इलाज चल रहा है। लोगों का आरोप है कि जलभराव से इलाके में मच्छर बढ़ गए हैं, जिससे बीमारियां फैल रही हैं। उधर, सरकारी अस्पतालों की ओपीडी में रोजाना 100 से अधिक बच्चे पहुंच रहे हैं।
इनमें से अधिकतर सर्दी-जुकाम के साथ बुखार से पीड़ित हैं। डॉक्टरों का कहना है कि चार से पांच दिन की दवा लेने के बाद उनकी सेहत में सुधार हो रहा है। गनीमत है कि बच्चों की कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आ रही है।
बलरामपुर अस्पताल के बाल रोग विभाग की ओपीडी में रोज 30-40 बच्चे बुखार की शिकायत लेकर आ रहे हैं।
ये संख्या सामान्य दिनों की अपेक्षा 20 से 30 प्रतिशत ज्यादा है। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. हिमांशु चतुर्वेदी का कहना है कि रोज 30 से अधिक बच्चे बुखार के आ रहे हैं।
वहीं, सिविल अस्पताल की बाल रोग ओपीडी 24 घंटे चल रही है। यहां भी जुखाम-बुखार के 30 से 40 बच्चे रोज आ रहे हैं। अस्पताल के कार्यवाहक निदेशक डॉ. एसके नंदा ने बताया कि बच्चों में वायरल फीवर का ग्राफ बढ़ा हुआ है।
लोकबंधु अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अजय शंकर त्रिपाठी ने बताया कि ओपीडी में रोज करीब 50 मरीज बुखार के आ रहे हैं। इसमें 10 से अधिक बच्चे बुखार से पीड़ित आ रहे हैं। बीआरडी महानगर में यह आंकड़ा 10 से 15 का है।
उधर, रानी लक्ष्मी बाई अस्पताल के सीएमएस डॉ. संगीता टंडन ने बताया कि फीवर क्लीनिक में 50 से 70 बुखार की शिकायत लेकर मरीज पहुंच रहे हैं। इसमें 10 से अधिक बच्चे बुखार के सामने आ रहे हैं।
डफरिन अस्पताल की बाल रोग ओपीडी में 25-30 बच्चे जुखाम-बुखार के पहुंच रहे हैं। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सलमान ने बताया कि ओपीडी में पहले की तुलना में बच्चों की तादाद बढ़ी है।
कोरोना की वजह से अधिक नहीं पहुंच रहे मरीज
कोरोना के खौफ से संवेदनशील इलाकों खदरा, फैजुल्लागंज, डालीगंज, मनकामेश्वर मंदिर समेत अन्य जगहों से बुखार के मरीज सीधे सरकारी अस्पताल नहीं जा रहे हैं। ये नजदीकी क्लीनिक व निजी अस्पताल से दवा ले रहे हैं। एक अनुमान के मुताबिक, करीब निजी अस्पताल व क्लीनिक से रोज 50 से अधिक बच्चे दवा ले रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों का कहना है कि सभी निजी क्लीनिक व अस्पतालों से बुखार के आने वाले मरीजों का रिकॉर्ड मांगा जा रहा है।
इन लक्षण से पीड़ित बच्चे आ रहे
- जुखाम संग बुखार
- नाक का बहना
- दस्त
सावधानी बरतें
- बुखार आए तो पैरासिटामॉल के अलावा कोई दवा न दें
- लिक्विड डाइट लेते रहें
- मां का दूध पिलाते रहें
- पानी की कमी न होने दें
- बुखार दो से तीन दिन में न उतरे तो डॉक्टर से परामर्श लें
अभी तक वायरल फीवर से ग्रस्त कुछ बच्चे ही अस्पताल पहुंच रहे हैं। अधिकतर परिजन नजदीकी अस्पताल व क्लीनिक से दवा ले रहे हैं। ऐसे में बच्चों के वायरल फीवर का सही आकलन सामने नहीं आ पा रहा है। फिलहाल आईएमए से संबद्ध अस्पतालों में अभी तक बच्चों की तादाद बहुत ज्यादा नहीं है।
- डॉ. रमा श्रीवास्तव, अध्यक्ष, आईएमए
फैजुल्लागंज में ये हैं पीड़ित
श्याम विहार कॉलोनी निवासी आदित्य मौर्या (10), अनुराग (12), करन (8), अंशू (6), नीलू (3), मदनलाल (35), कृष्ण लोक कॉलोनी में सूरज कश्यप (23), सुषमा (21) रीना कश्यप (20), रिंकू (10), व पिंकी (3), अनुज (10), विवेक (5), अनुष्का (6) सभी तेज बुखार व उल्टी-दस्त से पीड़ित हैं। इसके अलावा गायत्री नगर में भी लोग बुखार व उल्टी दस्त से पीड़ित हैं। अधिकांश मरीज निजी क्लीनिकों पर इलाज करा रहे हैं। गणेश विहार में रितू (5), अभिलाषा (12), पीहू (10), आदि (7) और पीयूष (9) समेत कई अन्य बच्चे बीमार हैं।
जलभराव से बढ़ीं संक्रामक बीमारियां
सामाजिक कार्यकर्ता ममता त्रिपाठी ने बीमार बच्चों के घर जाकर हाल लिया। ममता का कहना है कि इलाके में जलभराव से संक्रामक बीमारियां व बुखार का प्रकोप बढ़ा है। वहीं, स्वास्थ्य विभाग की टीम इलाके में लगातार नजर बनाए हुए हैं। इलाके में बीमार बच्चों को पीएचसी से दवा दिलाने संग उनकी जांच कराई जा रही है।